रांची: देश के बिजली वितरण क्षेत्र की ताजा स्थिति सामने आ गई है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की 14वीं वार्षिक एकीकृत रेटिंग रिपोर्ट के अनुसार निजी बिजली वितरण कंपनियों ने जहां शानदार आर्थिक प्रदर्शन किया है, वहीं सरकारी बिजली कंपनियों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है। झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) को वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 1,928 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जो राज्य की ऊर्जा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश की 12 निजी बिजली वितरण कंपनियों ने मिलकर 12,138 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया है। इन कंपनियों का प्रदर्शन मुख्य रूप से शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर रहा, जहां बिजली की खपत अधिक है और बिल वसूली भी अपेक्षाकृत मजबूत है। बेहतर प्रबंधन, आधुनिक तकनीक और कम बिजली चोरी निजी कंपनियों के लाभ का बड़ा कारण मानी जा रही है।
इसके विपरीत, सरकारी स्वामित्व वाली 42 बिजली वितरण कंपनियों में से 20 कंपनियों ने कुल 29,712 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है। इनमें झारखंड की JBVNL का घाटा भी शामिल है। रिपोर्ट में बताया गया है कि JBVNL को बिजली चोरी, बकाया बिलों की वसूली में दिक्कत, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक वितरण लागत और सब्सिडी के बोझ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन कारणों से निगम की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
हालांकि कुछ सरकारी बिजली कंपनियों ने लाभ भी कमाया है, लेकिन कुल मिलाकर सरकारी क्षेत्र का प्रदर्शन निजी कंपनियों की तुलना में कमजोर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों को सीमित क्षेत्र, बेहतर राजस्व मॉडल और प्रशासनिक स्वतंत्रता का लाभ मिलता है, जबकि सरकारी कंपनियों पर सामाजिक जिम्मेदारियों और राजनीतिक दबाव का असर पड़ता है।
JBVNL के बढ़ते घाटे को लेकर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं और राज्य की वित्तीय सेहत पर पड़ सकता है। बिजली चोरी पर सख्ती, बिल वसूली व्यवस्था को मजबूत करना और तकनीकी सुधार जैसे उपाय अपनाकर ही घाटे को कम किया जा सकता है।
कुल मिलाकर यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि बिजली वितरण क्षेत्र में निजी और सरकारी कंपनियों के बीच प्रदर्शन का अंतर लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकारी बिजली कंपनियां, खासकर JBVNL, इस घाटे से उबरने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं और ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन कैसे स्थापित होता है।


