राजस्थान : राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार को हुए भीषण बस अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 20 यात्रियों की जलकर मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसे के बाद अब डीएनए सैंपलिंग के जरिए शवों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Highlights:
डीएनए सैंपलिंग शुरू
हादसे में मारे गए 20 लोगों में से कई की शिनाख्त मुश्किल हो रही है। शव इतने बुरी तरह जल चुके हैं कि पहचान संभव नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने मृतकों के परिजनों से डीएनए सैंपल लेकर पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल और जैसलमेर के जवाहिर अस्पताल में विशेष व्यवस्था की गई है। हर मृतक के दो परिजनों के सैंपल लिए जा रहे हैं। मंगलवार देर रात तक 19 शवों को जोधपुर लाया गया। एक पोटली में सिर्फ हड्डियां मिलीं, जिसे भी सुरक्षित रखा गया है।
एसी स्लीपर बस में अचानक आग लग गई
मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर एसी स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। बस में लगभग 40 यात्री सवार थे। देखते ही देखते आग ने बस को अपनी चपेट में ले लिया। बस में सिर्फ एक ही दरवाजा होने के कारण यात्री बाहर नहीं निकल पाए। कई लोग बस में फंसकर जल गए। हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई। कई लोग 70% तक झुलस गए हैं। घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
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पटाखों से आग भड़कने का शक
हादसे के कारणों को लेकर कई दावे सामने आ रहे हैं। शुरुआत में शॉर्ट सर्किट की बात कही गई थी। बाद में एसी के कम्प्रेसर पाइप फटने से आग लगने की बात सामने आई। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बस की डिग्गी में पटाखे रखे थे, जिससे आग तेजी से फैली।
राज्य सरकार करेंगे मदद
राज्य सरकार ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
चश्मदीद बोले- ड्राइवर आग लगते ही भाग गया
हादसे के एक चश्मदीद हजार सिंह ने बताया- अचानक धमाका हुआ। जब हम पास पहुंचे तो बस में आग लगी थी और यात्री जलती बस से कूद रहे थे। बस का ड्राइवर मौके से भाग गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस में न तो इमरजेंसी गेट था और न ही खिड़की तोड़ने के लिए हैमर। यही वजह रही कि अधिकतर लोग बाहर नहीं निकल सके। कई शव एक-दूसरे के ऊपर चिपके मिले।
एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत
इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। सेना में कार्यरत महेंद्र मेघवाल अपनी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे के साथ छुट्टी पर जोधपुर आ रहे थे। सभी की जिंदा जलकर मौत हो गई। इसके अलावा, हादसे में पत्रकार राजेंद्र चौहान सहित कई अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवाई।
डीएनए सैंपलिंग में देरी पर परिजनों का गुस्सा
हादसे में मारे गए लोगों के परिजन बुधवार सुबह से ही जोधपुर और जैसलमेर के अस्पतालों में डीएनए सैंपल देने पहुंचे हैं। लेकिन सैंपलिंग में देरी के कारण परिजनों में नाराजगी है। जितेश चौहान नामक मृतक के परिजनों ने कहा कि वे सुबह से अस्पताल में हैं, लेकिन सैंपल प्रक्रिया देर से शुरू हुई।
सरकार पर आरोप, विपक्ष का हमला
हादसे पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर मौत के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हो रहे लगातार हादसे सरकार की नाकामी को दिखाते हैं। उन्होंने जैसलमेर कलेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई।
सीएम ने किया मौके का दौरा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार रात जैसलमेर पहुंचे और आर्मी कैंट में खड़ी जली हुई बस को देखा। उन्होंने हादसे की भयावहता को समझा और अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। इसके बाद जोधपुर में घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों को इलाज में किसी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। जैसलमेर बस अग्निकांड ने प्रदेश को गहरे शोक में डाल दिया है। 20 लोगों की मौत और कई घायलों के साथ यह राजस्थान का सबसे बड़ा बस हादसों में से एक बन गया है। सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल डीएनए सैंपलिंग के जरिए मृतकों की पहचान की जा रही है और घायलों का इलाज युद्धस्तर पर चल रहा है।


