कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सियासी माहौल उस समय गरमा गया जब आयकर विभाग (IT) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक देबाशीष कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की। आयकर विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह करीब छह बजे दक्षिण कोलकाता के मनोहरपुकुर रोड स्थित देबाशीष कुमार के घर और उनके चुनावी दफ्तर पर एक साथ दबिश दी। अधिकारियों ने दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक छापेमारी के पीछे की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
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पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहे
सूत्रों के अनुसार, देबाशीष कुमार पहले भी एक कथित जमीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में रह चुके हैं। उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहां उन्होंने एजेंसी के सामने अपने बयान दर्ज कराए थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या देबाशीष कुमार का कारोबारी अमित गांगोपाध्याय के साथ कोई वित्तीय संबंध है। हाल ही में अमित गांगोपाध्याय के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई थी, जिससे इस मामले की जांच और गहरी हो गई है।
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चुनाव से पहले कार्रवाई का असर
यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब राशबेहारी विधानसभा सीट पर चुनाव होने वाले हैं। यहां 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को मतगणना होगी। इस सीट पर भाजपा ने वरिष्ठ लेखक और राजनीतिक विश्लेषक स्वपन दासगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। छापेमारी के दौरान देबाशीष कुमार के घर के बाहर तनावपूर्ण माहौल बन गया। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।
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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मौके पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेरकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। चुनाव से ठीक पहले हुई इस छापेमारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इसका असर चुनावी रणनीति और माहौल पर भी देखने को मिल सकता है।


