नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की घटनाओं पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस गंभीर मुद्दे को नई दिल्ली ने ढाका के अधिकारियों के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर बार-बार उठाया है।
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विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित उत्तर में कहा कि भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन घटनाओं की गंभीरता से जांच करेगी और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हत्या, आगजनी और हिंसा जैसे अपराधों में शामिल सभी दोषियों को बिना किसी बहाने के न्याय के कटघरे में लाएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के घरों, संपत्तियों, व्यवसायों और पूजा स्थलों पर हो रहे हमलों की निगरानी लगातार कर रही है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर
विदेश राज्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने 4 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाया था। वहीं, विदेश मंत्री ने 16 फरवरी 2025 को बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन के साथ बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर की थी। सरकार ने दो टूक कहा कि बांग्लादेश के सभी नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करना वहां की सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सरकार ने अंतरिम सरकार की उस प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई, जिसमें अल्पसंख्यकों पर हमलों को व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक मतभेद या बाहरी कारणों से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत का मानना है कि इस तरह की सोच से चरमपंथियों और अपराधियों को बढ़ावा मिल सकता है और हालात और बिगड़ सकते हैं। भारत ने इस संबंध में अपनी चिंताओं से बांग्लादेश सरकार को स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है।
इसी दौरान सरकार ने यह भी बताया कि ‘प्रगति’ प्लेटफार्म बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आ रही बड़ी बाधाओं को दूर करने में प्रभावी साबित हुआ है। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रगति मंच के जरिए विभिन्न परियोजनाओं और सार्वजनिक शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाती है।


