रांची : झारखंड में 10,000 करोड़ से अधिक की राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र कई विभागों ने अब तक जमा नहीं कराए हैं, यह गड़बड़ी राज्य सरकार के अंकेक्षण निदेशालय ने पकड़ी है. निदेशालय ने इस राशि के गबन होने की आशंका जताई है. निदेशालय के अनुसार जिन विभागों से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं जमा कराए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से ऊर्जा, स्वास्थ्य, नगर विकास, स्कूली शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं.
Highlights:
वित्तीय गड़बड़ी के चौंकाने वाले आंकड़े
• 63.57 करोड़ का सीधा गबन: अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई
• 688 करोड़ की वसूली: 22 वर्षों में विभागों से नहीं हो सकी
• 476 करोड़ गलत मद में खर्च: विभागों की उदासीनता
• 180 करोड़ अग्रिम लिया: हिसाब नहीं दिया गया
विभागों को जारी नहीं हो कोई फंड
मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में जारी 30,038 करोड़ रुपये के अनुदान में से ₹8,549 करोड़ (पूंजीगत संपत्ति निर्माण हेतु) का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिला। इसे लेकर अंकेक्षण निदेशालय ने गबन की आशंका जताई है और वित्त विभाग से आग्रह किया है कि लंबित यूसी जमा करने वाले विभागों को आगे कोई फंड जारी न किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
इसी तरह ऊर्जा, स्वास्थ्य, नगर विकास, स्कूली शिक्षा और ग्रामीण विकास विभागों में सबसे अधिक उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित हैं। तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने अंकेक्षण निदेशलाय को वित्त विभाग द्वारा सरकार के विभागों को दी जाने वाली राशि का विशेष ऑडिट करने का निर्देश दिया था। अंकेक्षण निदेशालय ने वित्त विभाग द्वारा सरकार के विभागों को दी जाने वाली राशि का विशेष ऑडिट किया, जिसमें वित्तीय गड़बड़ी की चौंकाने वाली राशि और विभागों की उदासीनता सामने आयी।


