रांची : झारखंड में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पद JBVNL के एमडी/सीएमडी और ऊर्जा विभाग के सचिव पिछले दो महीनों से खाली पड़ी है. सितंबर के अंत में आईएएस अधिकारी अविनाश कुमार का तबादला कर उन्हें मुख्य सचिव बनाया गया। उनके रिलीव होते ही ऊर्जा विभाग और JBVNL दोनों के शीर्ष पद रिक्त हो गए। लेकिन अब तक राज्य सरकार ने इन पदों पर किसी नई नियुक्ति की नहीं है।
फैसलों में ठहराव, परियोजनाओं पर असर
इन महत्वपूर्ण पदों के रिक्त रहने का सीधा असर राज्य की बिजली व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय स्वीकृतियों पर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण फाइलें, अनुमोदन और नीति-निर्णय लंबित पड़े हैं। JBVNL और ऊर्जा विभाग से जुड़े कई टेंडर बीच में अटके हुए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय नहीं हो पा रहा है। सब्सिडी भुगतान, कॉन्ट्रैक्टुअल भुगतान, और अन्य वित्तीय स्वीकृतियाँ भी समय पर जारी नहीं हो पा रही हैं।
RDSS में नुकसान का खतरा
ऊर्जा वितरण व्यवस्था सुधारने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत भुगतान और प्रक्रियाओं की समय-सीमा तय रहती है। अधिकारियों के खाली पदों के कारण समय पर अनुमोदन और भुगतान न होने से: रीबेट (छूट) का लाभ नहीं मिल पाएगा, जिससे JBVNL को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा।
राज्य के बिजली क्षेत्र में अनिश्चितता
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा विभाग और JBVNL की शीर्ष कुर्सियों का एक साथ खाली रहना राज्य की बिजली व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति है। बिजली वितरण, ग्रामीण विद्युतीकरण, नेटवर्क अपग्रेडेशन, और उपभोक्ता सेवाओं से संबंधित कई निर्णय इसी स्तर पर लिए जाते हैं।
ऐसे में दो महीने से अधिक समय तक नेतृत्व का अभाव सिस्टम को धीमा कर रहा है और निवेश तथा परियोजनाओं की गति पर असर डाल रहा है। सूत्र यह भी बताते हैं कि विभागीय कामकाज सुचारू रखने के लिए इन दोनों पदों पर तत्काल नियुक्ति आवश्यक है। वरना राज्य में चल रही बिजली परियोजनाएँ, RDSS की समयबद्ध गतिविधियाँ, और वितरण सुधार योजनाएँ गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।


