Thursday, July 23, 2026

अवैध खनन सिंडिकेट के दबाव में चाईबासा में नो इंट्री लागू नहीं कर रही हेमंत सरकार – बाबूलाल मरांडी

चाईबासा : झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरम हो गई है। चाईबासा में सोमवार देर रात हुए नो-एंट्री आंदोलन पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर कड़े शब्दों में निशाना साधा। मरांडी ने कहा कि हेमंत सरकार के लिए जनता की जान से ज्यादा खनन माफिया का फायदा महत्वपूर्ण है। सरकार जनता की सुरक्षा की जगह खनन सिंडिकेट की सुरक्षा में लगी है। उन्होंने कहा कि चाईबासा के तांबो चौक पर पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आदिवासी ग्रामीणों पर बर्बरता की घटना ने झारखंड सरकार का क्रूर और अमानवीय चेहरा उजागर कर दिया है।

ग्रामीणों की ‘नो-एंट्री’ की मांग क्यों?

स्थानीय लोगों की मांग थी कि NH-220 मार्ग पर नो-एंट्री लागू की जाए, क्योंकि इस मार्ग से रोजाना अवैध लौह अयस्क और बालू ढोने वाले भारी ट्रक गुजरते हैं। इन ट्रकों की वजह से पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लोगों ने कहा कि जब वे सड़कों पर निकलते हैं, तो उनकी जान पर खतरा बना रहता है। ग्रामीण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी इस आंदोलन में शामिल थे और वे दिनभर सड़क किनारे शांतिपूर्ण तरीके से बैठकर अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे थे।

रात में पुलिस ने किया हमला

बाबूलाल मरांडी ने बताया कि जब ग्रामीण रात 11 बजे के करीब खाना खाकर विश्राम की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक पुलिस ने लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। उन्होंने कहा, “पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के आंसू गैस के गोले छोड़े, डंडे बरसाए और गोलियां चलाईं। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।” मरांडी ने कहा कि यह कार्रवाई दिखाती है कि सरकार लोकतांत्रिक आवाज़ को कुचलना चाहती है।

“खनन माफिया की रक्षा कर रही सरकार” – मरांडी

मरांडी ने कहा कि सरकार की हठधर्मिता का कारण साफ है की यह पूरा रास्ता अवैध खनन सिंडिकेट की जीवन रेखा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन ट्रकों से मंत्री से लेकर प्रशासन तक सभी को कमीशन मिलता है। इसलिए सरकार नो-एंट्री लागू नहीं करना चाहती, क्योंकि इससे उनकी अवैध कमाई का सिलसिला बंद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार की नीतियां अब जनविरोधी और माफिया-परस्त हो चुकी हैं। सरकार प्रशासन का इस्तेमाल माफिया को बचाने के लिए कर रही है, जबकि निर्दोष ग्रामीणों पर अत्याचार किया जा रहा है।

मधु कोड़ा ने भी की थी अवैध खनन की शिकायत

मरांडी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने भी अवैध खनन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी।
उन्होंने बताया कि 14 अक्टूबर को मधु कोड़ा ने नोवामुंडी में 6 अवैध ट्रकों की सूचना पुलिस को दी थी, जिनमें 3 ट्रक पहले से लोडेड थे और 3 लोडिंग के लिए तैयार थे। लेकिन दुख की बात है कि पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। यह दर्शाता है कि पुलिस खुद खनन माफिया के साथ मिली हुई है।

“यह राज्य प्रायोजित आतंक है” – मरांडी

भाजपा नेता ने कहा कि यह घटना केवल कानून व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की हिफाजत करने वाला राज्य-प्रायोजित आतंक है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन निर्दोष आदिवासियों को निशाना बनाया जो सिर्फ सड़क सुरक्षा और जीवन की रक्षा की मांग कर रहे थे। जो जनता अपनी सुरक्षा मांग रही थी, उन्हें सरकार की लाठियां और गोलियां मिलीं। यह लोकतंत्र के गाल पर तमाचा है, उन्होंने जोड़ा।

न्यायिक जांच और कार्रवाई की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मांग की है कि इस पूरी घटना की उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए और उन पर हत्या के प्रयास (IPC की धारा 307) के तहत मामला दर्ज हो। साथ ही, उन्होंने घायल ग्रामीणों के परिवारों को सरकारी मुआवजा और उचित चिकित्सा सुविधा देने की मांग की।

जनता भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकेगी मरांडी

मरांडी ने कहा कि झारखंड की जनता अब सरकार की दोहरी नीति और खनन माफियाओं के साथ मिलीभगत को समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार अवैध कमाई के लालच में अपने ही लोगों पर अत्याचार कर रही है। जनता अब चुप नहीं बैठेगी। आने वाले समय में हेमंत सरकार को जनता उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नो-एंट्री नियम तुरंत लागू नहीं किया गया, तो भाजपा राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी और सड़कों पर उतरकर न्याय की लड़ाई लड़ेगी।
भाजपा नेताओं का समर्थन

इस घटना के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं जैसे लुईस मरांडी, दिलीप वर्मा, समरी लाल और दीपक प्रकाश ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह घटना आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का प्रयास है और भाजपा हर मंच पर इस मुद्दे को उठाएगी। चाईबासा की यह घटना अब राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है। एक ओर ग्रामीण जीवन की सुरक्षा और नो-एंट्री की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार पर खनन माफिया के साथ मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की सियासत को और गर्म कर सकता है।

 

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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