Wednesday, November 4, 2026

झारखंड में 118 दिन बाद मॉनसून को अलविदा, 23% अधिक हुई बारिश – पूर्वी सिंहभूम में सबसे ज्यादा

 झारखंड : India Meteorological Department (IMD) ने झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2025 की विदाई की आधिकारिक घोषणा 13 अक्टूबर को की। इस साल राज्य में मॉनसून का आगमन 17 जून को हुआ था और 118 दिन तक बारिश का दौर चला। अब झारखंड में शुष्क मौसम की शुरुआत हो गई है।

118 दिनों में जमकर बरसे बादल

  • मॉनसून अवधि: 17 जून से 13 अक्टूबर
  • वास्तविक वर्षा: 1243.9 मिमी
  • सामान्य वर्षा: 1009.0 मिमी
  • औसत से ज्यादा वर्षा: 23%

IMD के अनुसार, यह अधिक वर्षा की श्रेणी में आता है। मॉनसून सीजन के दौरान राज्य में सामान्य से काफी अच्छी बारिश हुई है।

बारिश का फैक्ट फाइल

विवरण आँकड़े

  • कुल वर्षा 1198.8 मिमी
  • सामान्य वर्षा 1022.9 मिमी
  • ज्यादा बारिश वाले जिले 8
  • सामान्य बारिश वाले जिले 15
  • कम बारिश वाला जिला 1
  • सबसे अधिक बारिश पूर्वी सिंहभूम – 1666.1 मिमी
  • सबसे कम बारिश गोड्डा – 750.5 मिमी

सबसे ज्यादा बारिश पूर्वी सिंहभूम में

इस मॉनसून सीजन में सबसे अधिक वर्षा East Singhbhum district में दर्ज की गई। यहां कुल 1666.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो औसत से काफी ज्यादा है। वहीं, सबसे कम बारिश Godda district में दर्ज की गई, जहां 750.5 मिलीमीटर ही वर्षा हुई।

8 जिलों में ज्यादा, 15 में सामान्य बारिश

राज्य के कुल 24 जिलों में से:

  • 8 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हुई।
  • 15 जिलों में सामान्य बारिश हुई।
  • केवल 1 जिले में कम बारिश दर्ज की गई।

इससे साफ है कि राज्य में मॉनसून का असर लगभग पूरे झारखंड में समान रूप से दिखा।

अब शुरू होगा शुष्क मौसम

मॉनसून की विदाई के साथ ही झारखंड अब शुष्क मौसम की ओर बढ़ गया है। इसका असर फसलों की कटाई, तापमान और ग्रामीण इलाकों की गतिविधियों पर भी दिखेगा। IMD ने बताया कि आने वाले दिनों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है और आसमान साफ रहने की संभावना है।

किसानों के लिए राहत

इस बार अच्छी बारिश होने से धान की फसल को फायदा हुआ है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:

  • खेतों में पानी की उपलब्धता से फसलों की सिंचाई में राहत मिलेगी।
  • जलस्तर में सुधार से रबी फसल की बुवाई आसान होगी।
  • ग्रामीण इलाकों में जल संकट की संभावना भी कम होगी।

मॉनसून का असर राज्य के विकास पर भी

झारखंड में अच्छी बारिश का सीधा असर कृषि, जल संसाधन और बिजली उत्पादन पर पड़ता है। अधिक वर्षा से बांधों में पानी की पर्याप्त मात्रा बनी रहेगी, जिससे जलविद्युत और सिंचाई दोनों में फायदा होगा। मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार मॉनसून का पैटर्न राज्य के लिए लाभदायक रहा। 13 अक्टूबर को झारखंड से मॉनसून की विदाई के साथ ही इस सीजन का समापन हुआ। 23% अधिक बारिश होने से राज्य के किसानों और ग्रामीण इलाकों को राहत मिली है। अब राज्य में ठंड की शुरुआत धीरे-धीरे होने की संभावना है।

एयर नाऊ स्पेशल

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