बिहार: बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता काफी बढ़ा दी है। राज्य के 8 प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इन नदियों की सूची में गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बागमती और घाघरा शामिल है।
बढ़ का असर राज्य के 15 जिलों में दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर पानी घरों और आसपास के इलाकों तक पहुंच गया है, जिससे आम लोगों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने हालात को देखते हुए राहत और बचाव अभियान की तैयारियां भी शुरू कर दी है।
राजधानी पटना में भी गंगा, सोन और पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर एक चिंता का विषय बन गया है। गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 127 सेंटीमीटर ऊपर है, जबकि दीघा घाट पर 61 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं, श्रीपालपुर में पुनपुन नदी भी खतरे के निशान से करीब 2.01 मीटर ऊपर या चुकी है। साथ ही पुनपुन नदी का पानी आसपास के घरों तक भी पहुँच चुका है। इनके अलावा हाथीदह और कहलगांव में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और मुंगेर में भी गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर चुका है।
इसके अलावा, इंद्रपुरी बराज से सोन नदी में 5.54 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है, जिसके बाद मनेर, दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के दियारा इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। वहाँ पर फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए प्रशासन ने 12 सरकारी नावें भी तैनात की हैं। प्रशासन ने भी बढ़ते पानी को लेकर लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है।
समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 1.50 मीटर ऊपर पहुंच गया है। भागलपुर में भी गंगा के कटाव ने चिंता काफी बढ़ा दी है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर तेज कटाव होता जा रहा है। इससे रेलवे के टैगिंग बांध को भी खतरा पैदा हो गया है। बांध को बचाने के लिए दिन-रात काम चल रहा है। करीब 200 ट्रैक्टर और 3 स्टीमर बालू की बोरियां गिराने में जुटे हैं।
रोहतास के नौहट्टा में सोन नदी के टीलों पर खेती करने वाले करीब 100 लोग फंस गए हैं। जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन इन लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है।
राज्य के दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के निचले इलाकों में पानी फैलने के कारण लोगों की परेशानी काफी हद तक बढ़ गई है।
सरकार के मुताबिक पक्का घर पूरी तरह ध्वस्त होने पर 1.20 लाख रुपये, आंशिक रूप से पक्का घर क्षतिग्रस्त होने पर 6,500 रुपये, आंशिक रूप से कच्चा घर क्षतिग्रस्त होने पर 4,000 रुपये, झोपड़ी पूरी तरह नष्टहोने पर 8,000 रुपये और पशुओं का बाड़ा/शेड नष्टहोने पर 3,000 रुपये का राशि भुगतान किया जाएगा।
वहीं, अस्पताल में भर्ती होने या अंग क्षति की स्थिति में एक सप्ताह या उससे ज्यादा अस्पताल में भर्ती होने पर 16,000 रुपये, एक सप्ताह से कम अस्पताल में भर्ती होने पर 5,400 रुपये, 40% अपंगता/अंग क्षति होने पर 74,000 रुपये और 60% अपंगता होने पर 2.50 लाख रुपये सरकार द्वारा दिए जाएंगे।
और साथ ही बाढ़ में घर बहने या पूरी तरह प्रभावित होने पर जरूरी सामान के साथ कपड़े खरीदने के लिए 2,500 रुपये, बर्तन खरीदने के लिए 2,500 रुपये और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए 2,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में की सुरक्षा, उन लोगों को राहत पहुंचना और बाढ़ की स्तिथि पर लगातार नजर बनाए रखना हैऔर लोगों से बढ़ते पानी को लेकर सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है।

