झारखंड : दिवाली का त्योहार हर साल खुशियों, और राशनी से भरा होता है। लोग खुश होकर अपने घरों को सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं, और जम कर पटाखे भी फोड़ते हैं। लेकिन खुशी में लोग ये भूल जाते हैं कि इस उजाले के पिछे एक गंभीर समस्या भी छुपी होती है। वो है, प्रदूषण। वहीं प्रहूषण जिसे लोग दिवाली के दिन अनदेखा कर देते हैं और पूरे साल उसकी सजा भूगतते हैं।
JSPCB की रिपोर्ट
इस बार दिवाली से हुई प्रदूषण सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं, ये झारखंड की राजधानी रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में वायु के साथ साथ ध्वनी प्रदूषण भी दर्ज किया गया। खासकर राजधानी रांची की हालत सबसे खराब हो गई है। झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी (JSPCB) की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि रांची की हवा और ध्वनी दोनों ही मामले में रांची ने अन्य शहरों को पीछे छोड़ दिया है।
रांची के प्रमुख इलाकों में वायु प्रदूषण
रांची के कई प्रमुख इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य से कई गुण अधिक पाया गाया। खासकर अलबर्ट एक्का चौक और डोरंडा इलाके में हवा की गुणवत्ता सबसे खराब रही। आपको जान कर हैरानी होगी कि रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर वायु प्रदूषण सामान्य स्तर से लगभग 6 गुणा अधिक पाया गया। वहीं दिन में 76 डेसीबल और रात में 69 डेसीबल ध्वनी मापी गई। डोरंडा इलाके में दिन में 78 डेसीबल का ध्वनी प्रदूषण दर्ज किया गया, जो जिले में सबसे अधिक था।
जिसके कारण इस इलाके के लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। वहीं बच्चों, बुजुर्गों और ह्दय रोगियों के लिए यह स्थिती और भी खतरनाक साबित हो रही है।
धनबाद में बढ़ता AQI
धनबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स का स्तर 262 तक पहुंच गया, जो danger zone की सीमा के करीब माना जाता है। वहीं जमेशदपुर के आदित्यपुर इलाके में भी वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक पाया गया।
दिवाली के दिन पटाखों और उत्साह के कारण तीनों शहरों में हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई है कि यह लोगों के सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। सिर्फ वायु प्रदूषण ही नहीं, ध्वनी प्रदूषण ने भी लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य को प्रभावित किया। इतना अधिक ध्वनी प्रदूषण लंबे समय तक रहने के कारण लोगों में सिरदर्द, तनाव, चिड़चिड़ापन और निंद की समस्या पैदा कर सकती है। वहीं बच्चों की सुनने की क्षमता पर इसका असर पड़ता है। बढ़ता प्रदूषण दिल और दिमाग दोनों पर असर डालता है। ह्दय रोगियों तथा बुजुर्गों के लिए इसे और भी खतरनाक माना जाता है।
वायु और ध्वनी प्रदूषण
वायु और ध्वनी प्रदूषण से लोगों में सांस की बीमारियां, एलर्जी, दमा और ह्दय संबंधी रोग बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के दौरान पटाखों का प्रयोग सीमित होना चाहिए और साफ हवा के लिए सर्तक रहना जरूरी है। अगर अभी से इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में ये और गंभीर समस्या बन सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि लोगों को अपने सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। दिवाली जैसे त्योहारों में, जहां पटाखों और शोर का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में हमें सावधान रहना बेहत जरूरी है, और लोगों को ऐसे महौल में मास्क पहनकर निकलना चाहिए। सरकारी अधिकारी और पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार लोगों से अपिल करते हैं कि पटाखा जलाते समय सिर्फ त्योहार को ध्यान में रखते हुए नहीं बल्कि आम दिनों के लिए भी सोचकर निर्णय लेना चाहिए। अगर हर व्यक्ति थोड़ी सावधानी रखे तो यह समसेया काफी हद तक कम की जा सकती है।
रांची, धनबाद और जमशेदपुर में प्रदूषण का बढ़ता स्तर
इस बार दिवाली के बाद रांची, धनबाद और जमशेदपुर में प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया। विशेषकर राजधानी रांची में हवा और ध्वनि दोनों में काफी बढ़ोतरी हुई है। लोगों को ये ध्यान में रखना जरूरी है कि हम सिर्फ त्योहार का मजा ही न लें बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है।
इसलिए यह जरूरी है कि हर साल दिवाली पर उत्सव का मजा लेने के साथ साथ अपने पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। पटाखों का सिमीत उपयोग, सुरक्षित दूरी और सतर्कता से हम न केवल अपनी सेहत बचा सकते हैं बल्कि शहरों को प्रदूषण मुक्त बनाने में भी मदद कर सकते हैं।


