रांची: झारखंड में जेपीएससी परीक्षा पास कर खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा करने वाले अधिकारियों के लिए सिस्टम की सुस्ती अब मुसीबत बन गई है। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान 7वीं से 10वीं जेपीएससी के माध्यम से नियुक्त डीएसपी (DSP) की नियमित पोस्टिंग में हो रही देरी का मामला गरमाया रहा। बगोदर विधायक नागेन्द्र महतो ने सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी इन अधिकारियों को फील्ड में जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जा रही है?
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गृह विभाग से पूछे गए सवाल
विधायक नागेन्द्र महतो ने गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग से लिखित जवाब मांगते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
- जब इन अधिकारियों की सेवा सम्पुष्ट की जा चुकी है, तो इन्हें नियमित पोस्टिंग से वंचित क्यों रखा गया है?
- राज्य के कई जिलों और संवेदनशील अनुमंडलों में डीएसपी स्तर के अधिकारियों की भारी कमी है। क्या यह रिक्तता राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए जोखिम नहीं है?
- बिना किसी पदस्थापना के वेतन का भुगतान करना वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। विधायक ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
सरकार का ने कहा प्रक्रिया अभी जारी है
विधायक के सवालों का जवाब देते हुए सरकार की ओर से प्रभारी मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि इन अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर सरकार गंभीर है। उन्होंने बताया कि 07वीं-10 वीं जेपीएससी से बहाल डीएसपी अधिकारियों की नियमित पदस्थापना की कार्रवाई वर्तमान में प्रक्रियाधीन है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
सरकार ने साझा की खाली पदों की लिस्ट
सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने राज्य में डीएसपी स्तर के रिक्त पदों का ब्यौरा भी पेश किया।
प्रमुख रिक्त पद:
- एसडीपीओ (SDPO): मेदिनीनगर और रामगढ़
- मुख्यालय: डीएसपी सीसीआर रांची, डीएसपी मुख्यालय-2
- रेल व अन्य: डीएसपी रेल धनबाद, डीएसपी चक्रधरपुर
- प्रशिक्षण व वाहिनी: डीएसपी जैप-9, डीएसपी आईआरबी (5 और 10), जंगल वारफेयर नेतरहाट और टीटीएस जमशेदपुर


