बोकारो: झारखंड में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हो रही घटनाओं से ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल बना हुआ है। ताजा मामला बोकारो जिले से सामने आया है, जहां हाथियों के हमले में तीन बुजुर्गों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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गांव में दहशत का माहौल
घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों में डर और दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि हाथियों के कारण गांव में सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरने लगे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते 86 दिनों में हाथियों के हमलों में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा हाथियों के उत्पात में घरों को नुकसान, फसलों की बर्बादी, लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। बड़कीपुन्नू गांव के साथ-साथ आसपास के दर्जनों गांव इस समस्या से प्रभावित हैं।
वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि हाथियों के बढ़ते हमलों के बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि वे हर शाम इस डर के साथ अपने घरों में जाते हैं कि अगली सुबह सुरक्षित रह पाएंगे या नहीं। हाथियों की समस्या को लेकर कई बार वन विभाग के अधिकारियों को आवेदन भी दिया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
मुआवजे और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। घायल महिला के समुचित इलाज की व्यवस्था की जाए। हाथियों के आतंक को रोकने के लिए ठोस और स्थायी योजना लागू की जाए। बोकारो की यह घटना एक बार फिर झारखंड में मानव हाथी संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। ग्रामीणों को अब प्रशासन और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई का इंतजार है।


