पतरातू: रामगढ़ जिले के पतरातू स्थित पीटीपीएस कॉलोनी के पंचमंदिर में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह चरम पर है। करीब 65 वर्ष पुराने इस मंदिर में हर साल परंपरागत तरीके से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी मंदिर परिसर में पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई, जिसके साथ ही दुर्गा पूजा के धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई।
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पंचमंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि पतरातू की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का भी एक अहम हिस्सा है। दशकों से यहां दुर्गा पूजा की परंपरा चली आ रही है। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहता है और श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना में जुटते हैं।
दशहरा उत्सव का भी विशेष महत्व
पंचमंदिर में दुर्गा पूजा के साथ-साथ दशहरा उत्सव का भी विशेष महत्व है। यहां रावण दहन का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोग शामिल होने पहुंचते हैं। रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। इस आयोजन के कारण पंचमंदिर का दशहरा उत्सव स्थानीय लोगों के लिए खास आकर्षण रहता है। पूजा, मेले जैसा माहौल और रावण दहन की परंपरा मिलकर यहां के उत्सव को खास बनाते हैं।
पंडित जी का हुआ निधन
हालांकि, इस वर्ष की दुर्गा पूजा अपने साथ एक भावनात्मक पहलू भी लेकर आई है। इसी साल पंचमंदिर के मुख्य पुजारी गणेश दूबे जी का निधन हो गया। उनके निधन से मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को गहरा दुख पहुंचा है। वर्षों से पूजा परंपरा से जुड़े रहे मुख्य पुजारी की अनुपस्थिति इस बार महसूस की जाएगी। ऐसे में उनकी स्मृतियों के बीच श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं और मंदिर की पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं।
करीब 65 वर्षों की धार्मिक विरासत को संजोए पंचमंदिर में एक बार फिर दुर्गा पूजा की रौनक दिखाई देने लगी है। कलश स्थापना के साथ शुरू हुआ यह पर्व आने वाले दिनों में पूजा-अर्चना और दशहरा उत्सव के साथ आगे बढ़ेगा। श्रद्धालुओं को अब मां दुर्गा के दर्शन और रावण दहन के आयोजन का इंतजार है।
बहरहाल, पतरातू का पंचमंदिर इस तरह हर साल आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकजुटता का संदेश देता है। समय बदलने के बावजूद यहां की धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों को जोड़ने का काम कर रही हैं।

