Friday, June 19, 2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने 22 जून तक टेलीग्राम पर लगी अस्थाई रोक के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा

नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर सरकार की लगाई गई अस्थाई रोक को बरक़रार रखा है. लाइव लॉ के मुताबिक़ कोर्ट ने कहा, “सरकार सेक्शन 69-ए के तहत टेलीग्राम पर रोक लगा सकती है. इसी को देखते हुए टेलीग्राम पर लगाई गई अस्थाई रोक को चुनौती देने वाली याचिका ख़ारिज की जाती है.” इससे पहले सरकार के टेलीग्राम पर 22 जून तक लगाए गए बैन के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.

गुरूवार को कोर्ट में सुनवाई

इस मामले में 18 जून को केंद्र सरकार ने इस पर जवाब दाख़िल किया था. केंद्र ने गुरुवार को अदालत को बताया कि 21 जून को होने वाली नीट की दोबारा परीक्षा से पहले सिर्फ़ टेलीग्राम पर ही क्यों प्रतिबंध लगाया गया. गुरुवार, 18 जून को दिल्ली हाई कोर्ट की एक वैकेशन बेंच के जस्टिस तेजस कारिया ने दोनों पक्षों की अपील सुनने के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

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केंद्र सरकार का कोर्ट में बचाव

बार एंड बेंच के मुताबिक़, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाबी हलफ़नामे में दलील दी कि ‘बड़े पैमाने पर ग़लत जानकारी फैलाने के मामले में टेलीग्राम का बॉट आर्किटेक्चर इसे ख़ास तौर पर संवेदनशील बनाता है.’

सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए तुषार मेहता ने कहा कि टेलीग्राम का बॉट फ़ीचर बड़े पैमाने पर ग़लत जानकारी फैलाने और इंसानों की नज़र में बहुत कम आने वाले परिष्कृत नेटवर्क बनाने को सक्षम बनाता है. जबकि इस तरह के फ़ीचर अन्य मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म में नहीं हैं.

क्या था मामला

दरअसल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत आदेश जारी कर 22 जून तक भारत में टेलीग्राम प्लेटफ़ॉर्म पर बैन लगा दिया था. एक अन्य आदेश में प्लेटफ़ॉर्म को 30 जून तक पहले से पोस्ट किए गए संदेशों में बदलाव (एडिट) करने की सुविधा बंद करने के निर्देश दिए गए थे.सरकार ने कहा था कि 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम ज़रूरी है.

टेलीग्राम ने इस प्रतिबंध को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी. कंपनी का कहना था कि ‘पूरे ऐप को ब्लॉक करना न तो उचित है और न ही संवैधानिक.’ कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसने नीट से जुड़ी गैरक़ानूनी सामग्री वाले 900 से अधिक लिंक हटा दिए थे और उल्लंघनों की पहचान के लिए एआई, मशीन लर्निंग टूल्स और मानवीय निगरानी का इस्तेमाल किया था.

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