Wednesday, October 28, 2026

बिहार में विधान परिषद चुनाव में नामांकन की समय सीमा खत्म, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे व मंत्री दीपक प्रकाश को छोड़ना होगा पद

पटना : बिहार में विधान परिषद के 10 सीटों के चुनाव के लिए नामांकन भरने की समय सीमा सोमवार दोपहर तीन बजे खत्म हो गई. समय सीमा खत्म होने के साथ ही इस चुनाव को लेकर एनडीए के 9 उम्मीदवारों के अलावा राजद उम्मीदवार व विधान पार्षद सुनील सिंह ने भी नामांकन भरा. यानी 10 सीटों के लिए 10 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किए. अंतिम दिन नामांकन दाखिल करने वालों में जदयू उम्मीदवार व बिहार सरकार के स्वास्थय मंत्री निशांत कुमार के अलावा जदयू की शिवरानी देवी, भारती मेहता और ललन प्रसाद भी शामिल थे.

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सीएम सम्राट चौधरी नामांकन में शामिल

इधर विधान परिषद चुनाव के लिए बीजेपी उम्मीदवारों में भोजपुरी गायक व अभिनेता पवन सिंह, राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर भी शामिल थे. एनडीए उम्मीदवार के रूप में लोजपा(रा) के अशरफ अंसारी भी शामिल थे. नामांकन दाखिल करने के बाद वे सभी बिहार विधानसभा से रवाना हुए। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी व बीरेंद्र प्रसाद यादव भी मौजूद थे. अब 9 जून यानी मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी वहीं 11 जून तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. नाम वापस नहीं लेने की स्थिति में सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत जाएंगे.

बीजेपी ने कुशवाहा को दिया ऑफर

इस बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने सोमवार को इस चुनाव के लिए नामांकन नहीं भरा. ऐसे में उनका मंत्री पद जाना तय माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि रालोमो सुप्रीमो व राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा को बीजेपी की ओर से ऑफर मिला था कि उनके बेटे को कमल के चुनाव चिन्ह पर विधान परिषद में भेजा जाए. उपेंद्र कुशवाहा इसके लिए राजी नहीं हुए और दीपक प्रकाश विधान परिषद का उम्मीदवार बनने से चूक गए.

मंत्री पद बचना असंभव 

दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बिहार विधानमंडल के सदस्य नहीं हैं. न ही उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और न ही उन्हें विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया गया है. नियमों के अनुसार, बिना विधायक या परिषद सदस्य बने केवल 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रहा जा सकता है. इस दौरान मंत्री के पास दो ही विकल्प होते हैं, या तो उपचुनाव के जरिए सदन के सदस्य बनें या फिर इस्तीफा दें.

20 नवंबर 2025 को दीपक प्रकाश ने पहली बार नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ ली थी. इस दौरान छह महीने का कार्यकाल पूरा होने के पहले ही 13 अप्रैल को सीएम पद से इस्तीफा देने के कारण दीपक प्रकाश का मंत्री पद चला गया. 16 अप्रैल को एक बार फिर से उन्होंने सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री पद की शपथ ली, ऐसे में उन्हें एक बार फिर से छह महीनों के अंदर सदन का सदस्य बनना है, फिलहाल उनके पास 4 महीने से कुछ अधिक तक का समय है. इस दौरान उन्हें किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा नहीं तो 16 अक्टूबर को उनका मंत्री पद जाना तय है.

नियुक्ति को SC में चुनौती

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. याचिका में तर्क दिया गया है कि अनुच्छेद 164(4) के तहत 6 महीने बाद किसी गैर-विधायक को पुनर्नियुक्त नहीं किया जा सकता. याचिका के जरिए मंत्री पदों की नियुक्ति में संवैधानिक सीमाओं, वैधता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल उठाए गए हैं.

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