रांची: झारखण्ड लोक सेवा आयोग और झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में धांधली के आरोपों को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा बयान दिया है। आंदोलनरत युवाओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और युवाओं की सभी जायज मांगों को संजीदगी से लिया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री मंगलवार को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी स्थिति को लेकर गंभीर और संवेदनशील है। किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच के लिए विशेष टीम लगातार काम कर रही है। सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि सभी तथ्यों की पुष्टि हो सके।
किसका इंतजार कर रही हेमंत सरकार
इधर झारखंड भाजपा के प्रवेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेपीएससी-जेएसएससी मामले पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि “हम कितनी गंभीरता से काम कर रहे हैं, यह सीना चीरकर नहीं दिखा सकता।” अशोक बड़ाईक ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए सीना चीरकर दिखाने की जरूरत नहीं है। अगर सरकार वास्तव में गंभीर है, तो पिछले 11 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हजारों झारखंडी छात्रों की मांगें पूरी करके दिखाए। यही सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा है। अशोक बड़ाईक ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं, “जिस पर हम काम करते हैं, उसे ठीक करके ही दम लेते हैं।” अगर ऐसा है, तो सबसे पहले जेपीएससी और जेएसएससी की व्यवस्था को ठीक कीजिए।
परीक्षाओं की सीबीआई जांच
वर्ष 2019 के बाद हुई जेपीएससी, जेएसएससी, सीजीएल और अन्य सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराइए, फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दोषियों को शीघ्र सजा, 14वीं जेपीएससी मामले में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई तथा उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ में जान गंवाने वाले युवाओं के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसे पूरा करके दिखाए हेमंत सरकार।


