रांची: JPSC व JSSC परीक्षाओं की धांधली मामले की जांच में जुटी सीआईडी ने बड़ा खुलासा करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मामले में मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने इस वर्ष जेपीएससी की ओर से इस साल आयोजित दो महत्वपूर्ण परीक्षाओं एफआऱओ और एसीएफ में अपने पिता को भी शामिल कराया था. सीआईडी ने कोर्ट को सौंपे अपने सबूत में यह जानकारी दी है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL और और उसके मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी की भूमिका सबसे मुख्य पाई गई है.
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सीआईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि अभय तिवारी ने न सिर्फ अपनी पत्नी और भाई अक्षय तिवारी व अन्य रिश्तेदारों को परीक्षा पास करवाकर नौकरी दिलवाई, बल्कि अभय तिवारी ने अपने पिता सुखदेव तिवारी को भी TDPL द्वारा आयोजित एसीएफ और फॉरेस्ट रेजर ऑफिसर नियुक्ति परीक्षा में शामिल करवाया, इसका आयोजन इसी साल मार्च- अप्रैल के महीने में हुआ था.
अभय तिवारी अभ्यर्थियों को अपने खुद के फर्जी चयनों का उदाहरण देकर सिस्टम को मैनिपुलेट करने का भरोसा दिलाता था. वह पीटी (PT) परीक्षा पास कराने के नाम पर 5 लाख और अंतिम चयन के लिए 10 लाख से 25 लाख तक अभ्यर्थियों से वसूलता था. TDPL के लखनऊ के FF-67, आदर्श कॉम्प्लेक्स, जानकीपुरम स्थित कार्यालय से कंपनी के निदेशकों समरपाल सिंह और रणबीर सिंह एवं अन्य कर्मचारियों मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद अवध ने मिलकर धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए एक सीक्रेट सेल चला रखा था.
अभय तिवारी JSSC-CGL परीक्षा पेपर लीक मामले (2024) में नामकुम थाना (कांड संख्या 45/2024) में पहले से आरोपी है. इस बेहद चौंकाने वाले खुलासे के बाद CID अब पूरे मामले की नए सिरे से जांच कर रही है. CID इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि अभय तिवारी से जुड़े और कौन-कौन से लोगों ने JPSC की परीक्षा दी और उनका चयन हुआ.

