पाकुड़: जिले के समेकित जनजाति विकास अभिकरण कार्यालय में हुए करीब 12.38 करोड़ रुपये के भारी गबन मामले की जांच अब राज्य की सीआईडी ने संभाल ली है। इस सनसनीखेज घोटाले को लेकर वर्तमान जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का के बयान पर पाकुड़ नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसे अब सीआईडी ने टेकओवर कर लिया है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार सरकारी राशि की यह अवैध निकासी 1 फरवरी 2025 से 8 दिसंबर 2025 के बीच की गई.
Highlights:
बैंक प्रबंधक की सतर्कता से खुला राज
इस घोटाले का खुलासा 8 दिसंबर 2025 को हुआ, जब भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के प्रबंधक अभिनव ने जिला कल्याण पदाधिकारी को फोन कर बताया कि उनके कार्यालय से राशि हस्तांतरण के लिए एक ‘एडवाइस’ प्राप्त हुई है। बैंक प्रबंधक को संदेह था कि उस पत्र पर किए गए हस्ताक्षर अधिकारी के बैंक रिकॉर्ड वाले हस्ताक्षरों से मेल नहीं खा रहे हैं। जब बैंक ने इसकी गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि वह हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी थे।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कार्यालय के तत्कालीन अनुसेवक अक्षय रविदास संदिग्ध एडवाइस लेकर बैंक गए थे। बैंक में पूछताछ होने पर कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट और कार्यालय अधीक्षक मानवेन्द्र झा भी वहां पहुंचे और राशि निकासी का दबाव बनाने लगे। जब बैंक प्रबंधक ने हस्ताक्षर मिलान न होने की बात कही, तो इन कर्मियों ने एडवाइस वापस ले ली। बाद में, साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट ने उस एडवाइस को फाड़ दिया, जिसे बाद में अधिकारी की सख्ती के बाद टुकड़ों में बरामद किया गया।
28 लोगों को नामजद
इस मामले में पुलिस ने कुल 28 लोगों को नामजद किया है:इसमें विभागीय कर्मी में कार्यालय अधीक्षक मानवेन्द्र झा, कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट और अनुसेवक अक्षय रविदास के अलावा बाहरी संस्थाएं व व्यक्ति के रूप में मुकेश कुमार, मिठू कुमार झा, मिन्टू कुमार मिश्रा, शिव इंटरप्राइजेज, साहा इंटरप्राइजेज, बिप्लब साहा, वीणा देवी, निरंजन कुमार मिश्रा के अलावा बैंक के अज्ञात कर्मियों और पदाधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है。
अधिकारी ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि उनके पदभार ग्रहण करने से पूर्व तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी लक्ष्मण हरिजन के कार्यकाल के दौरान भी 7 ऐसे संदिग्ध एडवाइस जारी किए गए थे, जिन पर उनके हस्ताक्षर थे। प्रारंभिक ऑडिट और बैंक स्टेटमेंट के मिलान के बाद गबन की कुल राशि 12,38,66,600 रुपये आंकी गई है। हालांकि, जांच अधिकारी का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, घोटाले का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। फिलहाल सीआईडी सीसीटीवी फुटेज और बैंक के अन्य दस्तावेजों को खंगाल कर घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।


