रांची : CBI (रांची) ने Supreme Court of India में हस्तक्षेप याचिका दायर कर Jharkhand Vidhan Sabha नियुक्ति घोटाले की जांच फिर से शुरू करने की अनुमति मांगी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं की है। इससे पहले Jharkhand High Court ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया था, लेकिन विधानसभा ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 14 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद जांच रुक गई थी।
क्या है मामला
झारखंड विधानसभा में नियुक्तियों के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप। एक न्यायिक जांच आयोग ने भ्रष्टाचार की पुष्टि की थी। राज्यपाल ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की। हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। अब सीबीआई ने रोक हटाने की अपील की है। यह मामला झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ा अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई तय होने के बाद ही यह साफ होगा कि जांच दोबारा शुरू होगी या नहीं।
2014 में हुआ था न्यायिक जांच आयोग का गठन
सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा है कि विधानसभा में नियुक्ति और प्रोन्नति में अनियमितता की जांच के लिए 7 जुलाई 2014 को एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था। आयोग ने 30 बिंदुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए थे। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने कार्रवाई करने की बजाय एक दूसरा आयोग बना दिया, जिससे पहले आयोग की रिपोर्ट पर पर्दा डालने का आरोप लगा।
हाईकोर्ट ने माना था गड़बड़ी
दो अलग-अलग न्यायिक जांच आयोगों के गठन और नियुक्तियों में अनियमितता को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी। सुनवाई के बाद 23 सितंबर 2023 को हाईकोर्ट ने पाया कि दूसरा आयोग पहले आयोग की रिपोर्ट को दबाने के लिए बनाया गया था। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने इस आदेश के तहत प्रारंभिक जांच (PE) शुरू की थी।
सुप्रीम कोर्ट में रोक के बाद अटकी जांच
विधानसभा ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से मामले की जांच ठप है। अब सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर कर रोक हटाने की अपील की है। एजेंसी का कहना है कि प्रारंभिक जांच केवल तथ्यों की पुष्टि के लिए होती है, इसमें किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
सीबीआई का तर्क – जांच आगे बढ़ाने दी जाए
सीबीआई ने कहा है कि विधानसभा में नियुक्तियों के दौरान भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। हाईकोर्ट ने राज्यपाल की अनुशंसा और दोनों आयोगों की रिपोर्टों को देखते हुए जांच का आदेश दिया था। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक हटाई जाए ताकि मामले में आगे की जांच हो सके।


