सारंडा : राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठक अब 14 अक्टूबर को बुला ली है। यह बैठक पहले 16 अक्टूबर को प्रस्तावित थी। जानकारी के अनुसार, बैठक में सारंडा जंगल को वन अभयारण्य घोषित करने से जुड़ा अहम प्रस्ताव रखा जा सकता है।
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314 वर्ग किमी क्षेत्र को वन अभयारण्य बनाने का प्रस्ताव
बताया गया है कि 850 वर्ग किलोमीटर में फैले सारंडा जंगल में से 314 वर्ग किलोमीटर को वन अभयारण्य घोषित करने का आदेश भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है। इसी आदेश के तहत राज्य सरकार यह प्रस्ताव कैबिनेट में ला रही है।
15 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करना है एफिडेविट
8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सारंडा मामले पर सुनवाई हुई थी। अदालत ने सरकार को 15 अक्टूबर तक एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसी वजह से कैबिनेट की बैठक की तारीख आगे बढ़ाकर 14 अक्टूबर कर दी गई है, ताकि समय पर निर्णय लिया जा सके और कोर्ट में जवाब दिया जा सके।
कैबिनेट के लिए चार प्रस्ताव तैयार
सरकार ने कैबिनेट के लिए चार अलग-अलग प्रस्ताव (ए, बी, सी और डी) तैयार किए हैं—
- पहला प्रस्ताव: पूरे 314 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को वन अभयारण्य घोषित करना।
- दूसरा प्रस्ताव: 314 वर्ग किलोमीटर में जहां-जहां आयरन अयस्क (Iron Ore) की खदानें हैं, उस क्षेत्र को छोड़कर बाकी को वन अभयारण्य घोषित करना।
- तीसरा प्रस्ताव: 31 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को वन अभयारण्य घोषित करना, जिसमें खदानों वाला इलाका भी शामिल होगा। बाद में सरकार कोर्ट से खदानों को लेकर छूट की मांग कर सकती है।
- चौथा प्रस्ताव: चरणबद्ध तरीके से क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की नीति पर विचार।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सक्रियता
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार की सक्रियता बढ़ गई है। वन विभाग और संबंधित एजेंसियां इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। सरकार के इस कदम से क्षेत्र में खनन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
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सारंडा जंगल का महत्व
सारंडा जंगल झारखंड का सबसे बड़ा साल वन क्षेत्र है। यह जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहां पर आयरन अयस्क की कई खदानें भी स्थित हैं। इसी वजह से यह क्षेत्र लंबे समय से पर्यावरण और खनन गतिविधियों के बीच विवाद का केंद्र रहा है।
कैबिनेट बैठक में लिए जा सकते हैं अहम फैसले
राज्य सरकार आज दोपहर तीन बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में तय करेगी कि कौन सा प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में रखा जाएगा। इसके बाद 15 अक्टूबर को एफिडेविट दाखिल किया जाएगा। इस फैसले का सीधा असर झारखंड के पर्यावरण संरक्षण और खनन नीति पर पड़ेगा।


