Thursday, May 28, 2026

न कील, न स्टील, सिर्फ लकड़ी और नारियल की रस्सी से बनी नांव, जानें INSV कौंडिन्या की खूबियां

दिल्ली : भारत में हाथ से सिला गया पारंपरिक जहाज INSV ‘कौंडिन्य’ ने एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। यह जहाज 18 दिन की समुद्री यात्रा पूरी करके ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच गया। बुधवार को जहाज के मस्कट तट के पास पहुंचने की पुष्टि हुई। यह यात्रा पिछले साल 29 दिसंबर 2025 को गुजरात के पोरबंदर से शुरू हुई । इसे करीब 15 दिन में पूरा होना था, लेकिन खराब मौसम और समुद्र की स्थिति के कारण इसमें 18 दिन लग गए।

इस जहाज पर कमांडर विकास श्योराण के नेतृत्व में 16 सदस्यीय दल सवार था। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “इस पल का आनंद ले रहे हैं… हमने कर दिखाया।

जहाज के क्रू सदस्य हेमंत ने मस्कट दिखाई देने पर खुशी जताई। वहीं, अकेले दुनिया का चक्कर लगाने वाले नौसेना अधिकारी अभिलाष टॉमी ने भी बधाई दी। INSV ‘कौंडिन्य’ का डिजाइन अजंता की गुफाओं में बनी 5वीं सदी की एक पेंटिंग से प्रेरित है। इस जहाज को गोवा की एक कंपनी ने लगभग 2000 साल पुरानी टांका तकनीक से बनाया है। इसमें लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशे से सिलकर जोड़ा गया है। खास बात यह है कि इसमें कहीं भी कीलों का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

यह जहाज और भी खास इसलिए है क्योंकि इसमें न तो इंजन है और न ही GPS। यह पूरी तरह हवा और सूती पाल के सहारे चलता है। इस प्रोजेक्ट की कल्पना संजीव सान्याल ने की थी और केंद्र सरकार ने 2023 में इसे मंजूरी दी थी। इसका मकसद दुनिया को भारत के प्राचीन जहाज निर्माण कौशल से परिचित कराना है। जहाज का नाम पहली सदी के प्रसिद्ध भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है। यह जहाज भारत की समुद्री परंपरा, व्यापार और सांस्कृतिक विरासत का जीता-जागता प्रतीक है।

एयर नाउ स्पेशल

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