Thursday, July 23, 2026

सुप्रीम कोर्ट से झारखंड सरकार को बड़ी राहत: सारंडा के 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सेंक्चुअरी करने की मंजूरी,होती रहेगी SAIL की माइनिंग!

झारखंड : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को सारंडा वन्यजीव अभयारण्य (Sanctuary) घोषित करने की मंजूरी दे दी है। साथ ही यह निर्देश दिया कि इस निर्णय से वैध खनन और SAIL की गतिविधियाँ प्रभावित नहीं हों। कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दायर करने का आदेश भी दिया है।

कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

न्यायपीठ  मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई एवं न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन  ने राज्य सरकार की ओर से 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को सेंक्चुअरी घोषित करने की अनुमति दी। साथ ही SAIL और वैध खनन लीज को इस क्षेत्र के प्रभाव से बाहर रखा गया। कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों को शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत मानचित्र और अध्ययन रिपोर्टों की समीक्षा भी कोर्ट ने की।

सरकार का दलील और पीछे की कहानी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने WII (वन्यजीव संस्थान) के अध्ययन और मानचित्र को आधार बताया। पहले प्रारंभिक रूप से प्रस्तावित क्षेत्रफल 5,519.41 हेक्टेयर था, जिसे बाद में विस्तार की मांग की गई। सरकार ने कहा कि NGT के दिशा-निर्देशों के अनुसार बड़े क्षेत्र को शामिल करना ज़रूरी है।

विरोध और सावधानी

Amicus Curiae (कोर्ट का परामर्शदाता पक्ष) ने इस आदेश पर आपत्ति जताई  उनका कहना है कि सरकार ने पहले ही शपथपत्र में 31,468.25 हेक्टेयर को चिह्नित किया हुआ माना है। हालांकि, कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि सेंक्चुअरी बने क्षेत्र का असर SAIL और खनन गतिविधियों पर न पड़े।

महत्व और असर

यह निर्णय झारखंड के जंगलों और जीव-जंतु संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, खनन और उद्योग के हितों तथा पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास भी दिखता है। इस फैसले से इलाके में वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिलने की उम्मीद है। फैसले की प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी है, क्योंकि यह राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों को भी प्रभावित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को राहत देते हुए 31,468.25 हेक्टेयर को सारंडा सेंक्चुअरी घोषित करने की इजाज़त दी है। लेकिन यह भी तय किया कि इस दौरान खनन और SAIL की वैध गतिविधियों को बाधित नहीं किया जाए। अब आगे की दिशा इसी बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और संबंधित विभाग कितनी पारदर्शिता और तत्परता से काम करते हैं।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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