Thursday, November 5, 2026

रामगढ़ में अवैध माइंस हादसे में 4 मजदूरों की मौत मामले में पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे बाबूलाल मरांडी, लगाया ये आरोप

रामगढ़ : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी रामगढ़ के अरगड्डा इलाके में अवैध कोयला खनन हादसे में चार मजदूरों की हुई दर्दनाक मौत मामले का जायजा लेने घटनास्थल पहुंचे। साथ ही उन्होंने मृतक देवा बेदिया, डबलू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष घटवार के पीड़ित परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। परिजनों से विस्तृत जानकारी लेते हुए उन्होंने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

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हादसा नहीं सामूहिक हत्या

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चारों मजदूरों की असमय मृत्यु अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक है। जिन चार मजदूरों की मौत हुई है वे लोग काफी गरीब परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्ट तंत्र और संवेदनहीन व्यवस्था द्वारा की गई सामूहिक हत्या जैसी प्रतीत होती है।

जब बंद खदानों की घेराबंदी करना, सुरक्षा सुनिश्चित करना और लोगों की आवाजाही रोकना जिला प्रशासन और सीसीएल की सीधी जिम्मेदारी है, तो फिर सवाल उठता है कि आखिर रामगढ़ के डीसी, एसपी और सीसीएल प्रबंधन किस बात की तनख्वाह और सुविधा ले रहे हैं? क्या उनकी भूमिका सिर्फ़ हादसों के बाद औपचारिक बयान जारी करने तक सीमित रह गई है?

अवैध खनन कारोबार में संलिप्तता

बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जो सूचनाएं मिल रही है उसके अनुसार राज्य में हो रहे अवैध खनन कारोबार में सीएम हाउस की सीधी भूमिका है। कोई भी अवैध कारोबार हो, उससे हो रही कमाई का 75 प्रतिशत हिस्सा मुख्यमंत्री को जाता है। शेष 25 प्रतिशत में दलाल, बिचौलिए, पुलिस-प्रशासन और अन्य की हिस्सेदारी है। लूट के इस खेल में सरकार और प्रशासन तो शामिल है ही, वन विभाग की भी मिलीभगत है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हादसे के बाद जो बातें सामने आ रही हैं, वे तो इंसानियत को भी शर्मसार कर देने वाली हैं। आरोप है कि रेस्क्यू के नाम पर 5 हजार रुपये वसूले गए, गंभीर हालत में लोगों को बेहतर अस्पताल भेजने के बजाय सीधे सदर अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी गई। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं बल्कि गरीबों की मौत पर भी वसूली करने वाली निर्लज्ज व्यवस्था का वीभत्स चेहरा है।

खदानें बन रही मौत का कुआँ

उन्होंने कहा कि वैसे भी रामगढ़ अब कोयला चोरी, अवैध कारोबार और पुलिस संरक्षण के मामलों में धनबाद से पीछे नहीं रहा। पीछे रहे भी कैसे? जब सत्ता के गलियारों में “बोली” लगाकर पोस्टिंग तय होती हो, तो फिर जनता की सुरक्षा नहीं बल्कि “हफ्ता वसूली” ही प्राथमिकता बन जाती है। ऊपर से नीचे तक सेटिंग और हिस्सेदारी का खेल चलता रहे, इसलिए खदानें मौत का कुआँ बनी रहे… शायद यही मॉडल बना दिया गया है।

मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से कहा है कि यदि सरकार में संवेदनशीलता और जवाबदेही का थोड़ा भी अंश शेष है, तो इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। दोषियों पर सिर्फ़ निलंबन का दिखावटी मलहम नहीं, बल्कि हत्या जैसी धाराओं में कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा, सरकारी नौकरी और न्याय सुनिश्चित किया जाए। वरना जनता यह मानने को मजबूर होगी कि झारखंड में गरीब की जान की कीमत अब सिर्फ़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुआवजे की फाइल तक सीमित रह गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड में सरकार, प्रशासन और अवैध खनन माफियाओं का मजबूत सिंडिकेट बना हुआ है। वर्तमान राज्य सरकार में लूट खसोट चरम पर है। अवैध कारोबार में लगातार जनहानि हो रही है। विडम्बना है कि सरकार के संरक्षण में सब कुछ हो रहा है।

10-10 लाख रुपए मुआवजा

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस इलाके में 100 से अधिक अवैध सुरंगनुमा कूप बनाकर यहां कोयले की लूट हो रही है। और तो और इन कूपों में पंखा सहित अन्य सारी सुविधाएं भी मौजूद हैं। क्या इतनी व्यवस्था एक दिन में खड़ी हो गई ? स्पष्ट है, सारा कुछ मैनेज है।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को पीड़ित परिवार और अन्य ग्रामीणों ने बतलाया कि विस्थापन के कारण उन लोगों की जमीन चली गई है और नौकरी भी नहीं है। रहने के लिए घर तक नहीं है। मजबूरी में जान की कीमत पर कोयला का काम करना पड़ता है। पीड़ित परिवार ने सीसीएल से 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है।

एयर नाऊ स्पेशल

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