Thursday, July 23, 2026

अनुराग गुप्ता को लेकर और तल्ख़ हुए बाबूलाल मरांडी, बोले- इसके पीछे वसूली, अवैध उत्खनन, रंगदारी और भयादोहन

झारखंड : झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता को लेकर हेमंत सरकार पर मंगलवार को बड़ा निशाना साधा। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पूर्व आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को 2 वर्षों तक निलंबित रखने, फिर उन्हें डीजीपी बनाने, रिटायरमेंट के बाद भी सेवा विस्तार देने और अंत में इस्तीफा लेने के पीछे के रहस्य को राज्य की जनता जानना चाहती है. आखिर इसके पीछे कारण क्या है? प्रेसवार्ता में सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह,प्रवक्ता प्रतुल शाह देव भी उपस्थित थे.

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उन्होंने कहा कि आज तक जो बातें सामने आ रही है उसके पीछे अवैध वसूली,तस्करी,अवैध उत्खनन,रंगदारी और भयादोहन है. अनुराग गुप्ता ने मुख्यमंत्री के संरक्षण में वसूली के लिए इंस्पेक्टर गणेश सिंह, सिपाही रंजीत राणा, बिचौलिया मनोज गुप्ता, हरियाणा के किशन जी जैसे लोगों को कलैक्टर बहाल किया था और ये इतने प्रभावी हो गए हैं कि इन लोगों पर भी आजतक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई.  हेमंत सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों की संरक्षक बनी हुई है.

बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि शराब घोटाले को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से आगाह किया था लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे जानबूझकर अनसुना किया और बाद में सीबीआई इस मामले में छत्तीसगढ़ के बाद झारखंड तक पहुंच गई, आननफानन में एसीबी के जरिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे की गिरफ्तारी हुई. यहां भी राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया, 90 दिनों तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर जमानत का रास्ता प्रशस्त किया. आज तक घोटाले से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई. हेमंत सरकार भ्रष्टाचार को रोकना नहीं चाहती, यदि ऐसा नहीं होता तो बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी कानून बनाते, अवैध संपत्ति जब्त की जाती.

झारखंड में अवैध कफ सिरप मामले को लेकर नेता विपक्ष ने कहा कि इसे बढ़ावा देकर राज्य सरकार बच्चों के जान से भी खिलवाड़ करने में नहीं चूकी. जब गुजरात की टीम कार्रवाई करती है तो वही अवैध डीजीपी ने सीआईडी जांच कराने के बहाने अपराधियों को छोड़ने के लिए टेलीफोन किया. अवैध डीजीपी के कारनामे एक नहीं अनेक हैं. जब उन्हें सीआईडी, एसआईटी के डीजी से हटाया गया तो वे अपने ऑफिस से रातों रात कागजात हटाते रहे,,पेनड्राइव में सेव किया और सीएम को मामला उजागर करने के लिए धमका भी रहे.

बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि अवैध डीजीपी का कार्यालय लूट का अड्डा बना हुआ था, आज सूचना मिल रही है कि वे दिल्ली, हरियाणा से मुख्यमंत्री को धमका रहे हैं. आम तौर पर कुख्यात अपराधी को उसके गृह जिला से बाहर की जेलों में रखा जाता है लेकिन अनुराग गुप्ता ने सुजीत सिन्हा को पलामू की जेल में रखा, राजेश राम जैसे अपराधी की बैठकी अनुराग गुप्ता की गोपनीय शाखा में होती थी, मिलकर वसूली करते थे,झारखंड को लगातार लूट रहे थे. यह सब मुख्यमंत्री के संरक्षण में राज्य में पल बढ़ रहे भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के संरक्षण, पालन पोषण की सच्चाई है.

उन्होंने कहा कि इतना होने के बावजूद मुख्यमंत्री ने अब तक कोई जांच नहीं बैठाया. इसका सीधा अर्थ मामला लेन देन का है. मुख्यमंत्री को हिस्सेदारी नहीं मिलने की लड़ाई है अवैध डीजीपी का इस्तीफा और जांच नहीं होना. राज्य के कुछ अधिकारी आज हेमंत सरकार के टूल किट बन रहे. जबकि अधिकारियों को कानून के आधार पर जनहित में कार्य करना चाहिए, नहीं तो जांच होने पर वे भी कभी मुश्किल में पड़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि भस्मासुर को वरदान देना महंगा पड़ता है. अच्छा होगा मुख्यमंत्री उन्हें अपना सलाहकार बना लें ताकि सुरक्षित रहें.

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एयर नाऊ स्पेशल

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