Thursday, July 23, 2026

झारखंड में बालू घाटों की नीलामी तेज, सिमडेगा और लोहरदगा में तय हुई तारीखें

झारखंड : झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने के बाद बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य के अलग-अलग जिलों में प्रशासन अब तेजी से बालू घाटों की नीलामी पूरी करने में जुटा है। इसी कड़ी में सिमडेगा और लोहरदगा जिले में नीलामी की प्रक्रिया लगभग पूरी की जा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य झारखंड के सभी 24 जिलों में मौजूद कुल 444 बालू घाटों की नीलामी करना है। इससे आने वाले समय में निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है।

पहले क्यों लगी थी रोक

पेसा नियमावली लागू नहीं होने के कारण पहले झारखंड हाईकोर्ट ने बालू घाटों और अन्य लघु खनिजों के आवंटन पर रोक लगा दी थी। अब नई नियमावली लागू होने के बाद यह अड़चन दूर हो गई है और जिला प्रशासन नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

नए नियमों के तहत ई-नीलामी

द झारखंड सैंड माइनिंग रूल्स-2025 के तहत कैटेगरी-02 के बालू घाटों या घाटों के समूहों की ई-नीलामी की जाएगी। इसी नियमावली के तहत लोहरदगा और सिमडेगा जिला प्रशासन ने नीलामी की तिथियां घोषित कर दी हैं। सिमडेगा जिला में 22 जनवरी को कुल 14 बालू घाटों की नीलामी होगी। इनमें गोरा, रामजल, लताकेल, कोनारोइया, सोगरा-नानेसेरा, कोचेडेगा, पिथरा-02 एवं तिलगा, पिथरा एवं पोथाटोली, पैकपारा और कोरोमिया जैसे घाट शामिल हैं।

लोहरदगा जिला में 4 फरवरी को 13 बालू घाटों की नीलामी की जाएगी। प्रमुख घाटों में गितिलगढ़-खरता, डोबा, कोलसिमरी-डोबा, लावागाई-नदीनगड़ा, हरमू-भक्सो, कैमो-भक्सो, बरगांव-कैमो, जुरिया-तिगरा, डांडू-मेढ़ो, एकागुडी-मेढ़ो, सेन्हा-मेढ़ो, जोगना-मेढ़ो और उगरा-भड़गांव शामिल हैं।

बालू के दामों में दिखने लगा असर

नीलामी प्रक्रिया शुरू होते ही राज्य में बालू की कीमतों में सुधार देखने को मिल रहा है। हालांकि अभी सभी घाटों की नीलामी पूरी नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि जैसे ही 400 से अधिक चिह्नित बालू घाटों की नीलामी पूरी होगी, वैसे ही रांची समेत सभी जिलों में बालू के दाम में बड़ी गिरावट आएगी। इससे आम लोगों को घर बनाने में राहत मिलेगी और सरकारी निर्माण कार्यों की लागत भी कम होगी। पहले नीलामी नहीं होने के कारण अवैध बालू की बिक्री मनमाने दामों पर हो रही थी, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब नई व्यवस्था से इस पर रोक लगने की उम्मीद है।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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