रांची: झारखंड हाईकोर्ट के चर्चित अधिवक्ता मनोज टंडन की कार की जब्ती और उसे रिलीज करने को लेकर चल रहा कानूनी घमासान अब और तेज हो गया है। डोरंडा पुलिस द्वारा कार रिलीज करने के आदेश के खिलाफ निचली अदालत में रिवीजन याचिका दायर करने के बाद, अब यह मामला सीधे झारखंड हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है।
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एडवोकेट एसोसिएशन ने संभाला मोर्चा
इस पूरे प्रकरण में अब अधिवक्ता संघ ने भी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। संघ की ओर से हाईकोर्ट में एक अंतरिम आवेदन (Interim Application – IA) दाखिल किया गया है। इसमें कार को रिलीज करने की प्रक्रिया में आ रही अड़चनों और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
जस्टिस एस.के. द्विवेदी की अदालत में हुई चर्चा
गुरुवार को जस्टिस एस.के. द्विवेदी की अदालत में इस मामले की जानकारी दी गई। अदालत को बताया गया कि:
निचली अदालत ने कार छोड़ने का आदेश दिया था। लेकिन, डोरंडा थाना प्रभारी ने इस आदेश को रांची सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायायुक्त की अदालत में चुनौती दे दी है। वहीं अधिवक्ता मनोज टंडन की ओर से पहले से ही एक क्रिमिनल रिवीजन याचिका हाईकोर्ट में लंबित है।
क्यों बढ़ा विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला एक कार और बाइक की टक्कर के बाद शुरू हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे से जुड़ा है। पुलिस का रुख इस मामले में काफी सख्त रहा है, जबकि अधिवक्ता पक्ष इसे सेल्फ डिफेंस और मॉब लिंचिंग के डर से की गई कार्रवाई बता रहा है। निचली अदालत द्वारा कार छोड़ने के फैसले पर पुलिस का रिवीजन में जाना इस विवाद को और लंबा खींचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट अब इस मामले पर गुरुवार, 26 फरवरी को सुनवाई करेगा।

