रांची : 21 अगस्त को राजधानी रांची में पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान पुतला छीनने, मारपीट, छेड़छाड़ व अपशब्द का प्रयोग करने को लेकर छात्रा प्रतिमा कुमारी ने सोमवार को कोतवाली थाना में जेएमएम के 8 कार्यकर्ताओं के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। प्राथमिकी में शामिल नामों में नवीन चंचल, उत्तम यादव, शाहबाज मलिक, मुस्ताक आलम, आशुतोष वर्मा उर्फ सोनू वर्मा, अंकिता वर्मा, डॉ. हेमलाल कुमार मेहता और अश्विनी शर्मा शामिल हैं. इसके अलावा अन्य 35-40 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भी विधिसम्मत कार्रवाई करने की मांग की गई है। इस दौरान झारखंड भाजपा के नेता बाबूलाल मरांडी समेत कई अन्य भी मौजूद थे.
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बीजेपी ने लगाया आरोप

इधर इसे लेकर झारखंड भाजपा के सोशल मीडिया हैंडल फेसुबक पर जानकारी साझा करते हुए बताया गया, “नेता प्रतिपक्ष
Babulal Marandi जी की उपस्थिति में छात्रा प्रतिमा कुमारी विगत दिनों राँची में पुतला दहन के दौरान उनके साथ हुई बदसलूकी के खिलाफ कोतवाली थाना पहुंचकर सभी गुंडों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई करने की मांग को लेकर FIR दर्ज कराया। इस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष
Deepak Prakash, प्रदेश महामंत्री
Amar Kumar Bauri सहित राँची महानगर के कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
पोस्ट में आगे लिखा गया, “हेमंत सरकार के संरक्षण में यदि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रही छात्राओं के साथ ऐसी अभद्रता होगी, तो भाजपा चुप नहीं बैठेगी। छात्राओं के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ी जाएगी। प्रतिमा ने घटना का विवरण देते हुए बताया है कि वह 21 अगस्त को JPSC-JSSC की परीक्षाओं में अनियमितता के विरोध में रांची में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुई थीं।”
“आंदोलन के दौरान वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला लेकर जा रही थीं। प्रतिमा का आरोप है कि झामुमो के कार्यकर्ताओं ने उनके हाथ से पुतला छीन लिया और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। प्रतिमा का आरोप है कि उनके साथ इस दौरान छेड़छाड़ और बदसलूकी भी की गई।”
प्राथमिकी में लगाए गए आरोप

इधर दर्ज कराई गई प्राथमिकी में प्रतिमा ने आरोप लगाया कि शाहबाज ने उनके खिलाफ अभद्र, अपमानजनक और धमरी भरे शब्दों का प्रयोग किया। इस दौरान मुश्ताक आलम, अंकिता वर्मा, आशुतोष वर्मा, नवीन चंचल और अश्विनी शर्मा ने भी उनके साथ बदसलूकी की।
प्रतिमा ने दावा किया कि घटनाक्रम का वीडियो और तस्वीर भी उपलब्ध है जिससे आरोपियों की पहचान की जा सकती है। इससे संबंधित वीडियो फुटेज, CCTV फुटेज व समाचार माध्यमों में आए वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए वीडियो को सुरक्षित किए जाने की मांग की है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।