Wednesday, July 22, 2026

राज्य के अधिकारियों पर बाबूलाल मरांडी का निशाना, बोले – जनप्रतिनिधियों के कॉल भी नहीं उठाते

झारखंड : झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के कई वरीय अधिकारी जनप्रतिनिधियों तक के फोन कॉल को अनदेखा कर रहे हैं, जिससे प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।

बोकारो के DC, SP और SDO पर लगे आरोप

मरांडी ने बताया कि आज सुबह लगभग 11 बजे उन्होंने बोकारो जिला प्रशासन से जनसरोकार के एक मुद्दे पर बात करने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने डीसी, एसपी और एसडीओ के सरकारी और निजी नंबरों पर कई बार कॉल किया, लेकिन सभी नंबर स्विच ऑफ मिले। उन्होंने कहा कि जब दिन के समय जिले के शीर्ष अधिकारी फोन पर उपलब्ध नहीं होते, तो यह स्पष्ट करता है कि सरकार किस गंभीरता से काम कर रही है।

अधिकारियों पर वसूली और दलाली के लिए कई नंबर रखने का आरोप

मरांडी ने बड़ा आरोप लगाया कि झारखंड में कई वरिष्ठ अधिकारी –

  • 3-4 मोबाइल नंबर रखते हैं
  • सरकारी नंबर कभी रिसीव नहीं किए जाते
  • निजी नंबर सिर्फ परिचितों के लिए
  • और सीक्रेट नंबर कथित वसूली और दलाली के धंधे के लिए

उन्होंने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ अधिकारी 7-8 मोबाइल फोन एक बैग में लेकर चलते हैं और उनके लिए दलाली का काम करने वाले लोग वसूली की रकम नेटवर्किंग के जरिए पहुंचाते हैं।

मुख्यमंत्री पर जिम्मेदारी तय करने की मांग

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री खुद जांच करें कि कैसे कुछ अधिकारी बेनामी नंबरों के सहारे धंधा कर रहे हैं और उनकी आंखों में धूल झोंक रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अनुशासन की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। अधिकारियों को कुर्सी पर बैठने के लिए नहीं, जनता की सेवा के लिए नियुक्त किया गया है।

आम जनता तक पहुंच पर सवाल

मरांडी ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री तक अधिकारियों से बात नहीं कर पा रहे तो आम जनता का क्या हाल होगा, सहज समझा जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष की यह टिप्पणी झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर