रांची : राजधानी रांची के डोरंडा स्थित Jharkhand Armed Police-1 Ground में शुक्रवार से तीन दिवसीय दिवाली मेले की शुरुआत हो गई। यह मेला 16 से 18 अक्टूबर तक चलेगा। इस आयोजन की पहल IPS Officers Wives Association (IPSWA) ने की है। खास बात यह है कि 7 साल बाद फिर से इस मेले का आयोजन किया जा रहा है और यह इसका 25वां संस्करण है। मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री Hemant Soren और उनकी पत्नी Kalpana Soren ने संयुक्त रूप से किया।
Highlights:

सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक खुले रहेंगे मेले के दरवाजे
दिवाली मेले का समय सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक तय किया गया है। इस दौरान लोग यहां आकर खरीदारी के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद ले सकेंगे। मेले में 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं जिनमें दिवाली की सजावट, फैशन, स्थानीय हस्तशिल्प और स्वादिष्ट खानपान की झलक देखने को मिलेगी। लाइव पॉटरी (मिट्टी के बर्तन बनाना), पारंपरिक हस्तशिल्प और सजावटी सामान मुख्य आकर्षण बने हुए हैं।
सांस्कृतिक मंच पर झलकेगी झारखंडी संस्कृति
मेले में स्थानीय लोक कलाकार आधुनिक और ग्रामीण संस्कृति पर आधारित नृत्य और संगीत प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा पुलिस आधुनिकीकरण स्टॉल भी लगाया गया है ताकि आम लोग राज्य पुलिस की नई तकनीकों और उपकरणों को करीब से देख सकें। बच्चों के लिए गेम ज़ोन, छात्रों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता, कठपुतली शो, जादू शो और संगीतमय संध्याएं इस आयोजन को और खास बना रही हैं।

30 रुपये में प्रवेश, बच्चों के लिए फ्री
IPSWA की अध्यक्ष ने बताया कि मेला झारखंड की संस्कृति को आम लोगों तक पहुंचाने की एक पहल है। प्रवेश टिकट की कीमत 30 रुपये रखी गई है। 7 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा। मेले में पारंपरिक और आधुनिक प्रदर्शनों का भी विशेष प्रबंध किया गया है, जिसमें तीरंदाजी, एयरो मॉडलिंग और सोहारी पेंटिंग शामिल हैं।
7 साल बाद वापसी, दिवाली में बढ़ेगी रौनक
यह दिवाली मेला रांची के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। सात वर्षों बाद इसके आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। IPSWA का यह 25वां वर्ष है, जो इसे और खास बनाता है। त्योहारों के इस मौसम में मेला न सिर्फ मनोरंजन का केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्पकारों और उद्यमियों को अपनी प्रतिभा और उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर भी देगा। तीन दिनों तक चलने वाला यह मेला दिवाली की रौनक को और बढ़ाने वाला है, जहां संस्कृति, कला और परंपरा का संगम देखने को मिलेगा।


