Tuesday, September 15, 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : 18 से 21 अक्टूबर तक दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों की इजाजत, दिवाली पर केवल 3 घंटे की छूट

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रदूषण नियंत्रण और त्योहारों के बीच संतुलन बनाते हुए दिल्ली-एनसीआर में 18 से 21 अक्टूबर तक सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति दे दी है। दिवाली के दिन 20 अक्टूबर को लोग सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात में 8 बजे से 10 बजे तक यानी कुल 3 घंटे के लिए ग्रीन पटाखे फोड़ सकेंगे। यह फैसला बी. आर. गवई और के. विनोद चंद्रन की दो सदस्यीय बेंच ने सुनाया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) गवई ने कहा कि हमें एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, लेकिन पर्यावरण के साथ समझौता किसी भी हाल में नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल ग्रीन पटाखे ही चलाए जा सकते हैं और वह भी निर्धारित समय सीमा में। 20 अक्टूबर को दिवाली के मौके पर सुबह और रात – दो बार में कुल 3 घंटे की छूट होगी। जबकि 18, 19 और 21 अक्टूबर को भी सीमित समय के लिए पटाखे फोड़ने की इजाजत दी जाएगी। इस फैसले से एक ओर जहां दिवाली पर लोगों को सीमित उत्सव की छूट मिली है, वहीं बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कड़े प्रतिबंध भी बनाए रखे गए हैं।

ग्रीन पटाखे बनाने पर भी सख्त नियम

इससे पहले 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखे बनाने की इजाजत दी थी। हालांकि यह छूट सिर्फ उन्हीं निर्माताओं को मिली थी जिनके पास National Environmental Engineering Research Institute (NEERI) और Petroleum and Explosives Safety Organisation (PESO) का लाइसेंस है। कोर्ट ने साफ कहा था कि लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही ग्रीन पटाखे बना सकते हैं और फिलहाल NCR क्षेत्र में पटाखों की बिक्री नहीं की जा सकती।

सिर्फ दिल्ली ही क्यों, पूरे देश में बैन हो- CJI

12 सितंबर को सुनवाई के दौरान CJI गवई ने कहा था कि अगर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को कम करने के लिए पटाखों पर रोक लगाई जा सकती है, तो बाकी देश को भी स्वच्छ हवा का अधिकार है। उन्होंने कहा था, अगर प्रतिबंध लगाना है तो यह पूरे देश में लागू होना चाहिए। साफ हवा का अधिकार केवल दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं रह सकता।

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा – GRAP-1 लागू

दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्तर में लगातार वृद्धि के बाद Commission for Air Quality Management (CAQM) ने तत्काल प्रभाव से Graded Response Action Plan (GRAP) के पहले चरण को लागू कर दिया है।

GRAP-1 लागू होने के बाद-

  • सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा।
  • खुले में कचरा जलाने पर रोक होगी।
  • निर्माण मलबे का सही निपटान जरूरी होगा।
  • सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा।

CAQM के अनुसार, सोमवार को दिल्ली में Air Quality Index (AQI) 211 दर्ज किया गया था, जो “खराब” श्रेणी में आता है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में प्रदूषण के स्तर के और खराब होने की संभावना जताई है।

AQI क्या होता है?

AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स, हवा में प्रदूषण की मात्रा मापने का एक पैमाना है। इसमें CO (कार्बन मोनोऑक्साइड), OZONE (ओजोन), NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड), PM 2.5 और PM 10 जैसे पॉल्यूटेंट्स को मापा जाता है।

  • 0–50: अच्छी हवा
  • 51–100: संतोषजनक
  • 101–200: मध्यम
  • 201–300: खराब
  • 301–400: बहुत खराब
  • 401–500: गंभीर

इस समय दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में AQI 300 के पार चला गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है।

स्वास्थ्य पर खतरे की घंटी

बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, सिरदर्द और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और केमिकल हवा में PM 2.5 की मात्रा बढ़ा देता है, जो सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।

संतुलित दृष्टिकोण की अपील

CJI गवई ने आदेश में कहा, हम उत्सवों पर रोक नहीं लगा रहे, लेकिन पर्यावरण के साथ समझौता भी नहीं हो सकता। लोग तय समय में ग्रीन पटाखे फोड़ें और बाकी समय प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिवाली पर प्रदूषण और परंपरा के बीच संतुलन साधने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। जहां लोगों को सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे फोड़ने की छूट दी गई है, वहीं प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। आने वाले दिनों में AQI के स्तर को देखते हुए यह साफ है कि प्रदूषण पर रोकथाम के लिए सरकार, नागरिक और संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

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