झारखंड : झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मधुकम खादगढ़ा और रूगड़ीगाढ़ा में शहरी गरीबों के फ्लैट पर कब्जे के मामले को गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रांची नगर निगम को आदेश दिया कि वे बिना विलंब के कब्जाधारी को हटाने की कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ कब्जे का नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है।
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कोर्ट ने व्यक्त की नाराजगी
कोर्ट ने निगम की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर इतने समय तक सरकारी अधिकारियों ने इस मामले पर ध्यान क्यों नहीं दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैरकानूनी कब्जा सिर्फ कानून तोड़ने वाले व्यक्तियों की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। हाई कोर्ट ने कहा कि गरीबों के लिए बने फ्लैट का गलत इस्तेमाल कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रांची नगर निगम को कार्रवाई का अल्टीमेटम
हाई कोर्ट ने रांची नगर निगम को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर कब्जाधारी को हटाया जाए और कोर्ट में रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में निगम को अपनी कार्रवाई की पूरी जानकारी देनी होगी, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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मामले में शामिल फ्लैट
रांची के मधुकम खादगढ़ा और रूगड़ीगाढ़ा में शहरी गरीबों के लिए कुल 670 फ्लैट बनाए गए थे। इनमें से 210 से अधिक फ्लैट पर गैरकानूनी कब्जा किया गया था। इस पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि फ्लैट का गलत इस्तेमाल गरीबों के हितों के खिलाफ है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
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दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि इस मामले में जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि अगर अधिकारी लापरवाही करते रहे तो उन्हें अपने पद की जवाबदेही भी भुगतनी होगी। यह कदम सरकारी संस्थाओं में अनुशासन सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए अहम माना जा रहा है।
कानून और व्यवस्था की गंभीर स्थिति
हाई कोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी कब्जा सिर्फ संपत्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था और नागरिकों के विश्वास पर भी असर डालता है। कोर्ट ने रांची नगर निगम को सख्त चेतावनी दी कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंच सकता है।
हाई कोर्ट का यह आदेश गरीबों के लिए बने फ्लैट की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रांची नगर निगम के लिए अब यह चुनौती है कि वे समय पर कब्जा हटाने की कार्रवाई पूरी करें और कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें। न्यायपालिका की निगरानी में अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी फ्लैट का लाभ वास्तव में गरीबों तक पहुंचे और किसी भी तरह की अनियमितता दोबारा न हो।


