Saturday, September 12, 2026

PoK में गुस्से का विस्फोट: महंगाई, बिजली और अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतरे हज़ारों लोग

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जहाँ आज हालात पहले से कहीं ज़्यादा उथल-पुथल भरे हैं। शहबाज़ शरीफ़ सरकार के खिलाफ ज़बरदस्त ग़ुस्सा सड़कों पर उतर चुका है। हज़ारों लोग एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं, बाज़ार बंद हैं, सड़कें खाली पड़ी हैं और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो चुका है।

इन प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहा है आवामी एक्शन कमेटी (AAC), जिसने लोगों से शटर डाउन और व्हील जाम यानी दुकानों की तालेबंदी और सड़कों पर जाम का आह्वान किया है। यह आंदोलन सिर्फ एक दिन का नहीं बल्कि अनिश्चितकाल तक चल सकता है। विरोध जताने वाले लोग कह रहे हैं कि अब वे सरकार से कोई समझौता नहीं करेंगे और अपने सभी मूलभूत अधिकार लेकर ही मानेंगे।

मुअज्ज़फ़राबाद, मीरपुर, कोटली समेत कई शहरों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाऐं बंद

विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा असर राजधानी मुअज्ज़फ़राबाद समेत मीरपुर, कोटली, रावलाकोट, नीelum वैली और केरन जैसे इलाकों में देखा जा रहा है। लोग हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारे लगा रहे हैं—महँगाई के खिलाफ, बिजली दरों के खिलाफ और पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ।

इन प्रदर्शनों के बीच हालात इतने बिगड़ गए हैं कि प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को कई जगहों पर बंद कर दिया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सोशल मीडिया और मोबाइल नेटवर्क को ठप कर देने का मक़सद यही है कि लोग एकजुट होकर बड़े स्तर पर इकट्ठा न हो सकें। लेकिन इसके बावजूद हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

सुरक्षा हालात पर नज़र डालें तो पाकिस्तान सरकार ने PoK के कई ज़िलों में भारी तादाद में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात कर दिए हैं। जगह-जगह नाकेबंदी कर दी गई है, वाहनों की तलाशी ली जा रही है और शहरों के प्रवेश-द्वारों को भी सील किया गया है। माहौल इतना सख़्त कर दिया गया है कि आम नागरिकों में डर और बेचैनी साफ महसूस की जा सकती है।

AAC की 38 सूत्री माँग

सबसे पहली माँग है कि PoK विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को ख़त्म किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये सीटें पाकिस्तान में बसे शरणार्थियों के लिए हैं, जिससे PoK के स्थानीय लोगों की आवाज़ दब जाती है।
दूसरी बड़ी माँग है कि उन्हें सस्ती आटा-आपूर्ति और रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ों पर सब्सिडी दी जाए। तीसरी और बेहद अहम माँग है कि बिजली की दरों को घटाया जाए। PoK में ही मंगला और नीलम-झेलम जैसे बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट हैं, लेकिन वहाँ के लोगों को महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस इलाके से पाकिस्तान को सस्ती बिजली मिल रही है, वहीं के लोग सबसे ज़्यादा महँगा बिल चुका रहे हैं—यह दोहरी मार है।

इन प्रदर्शनों से पहले AAC और सरकार के बीच बातचीत भी हुई थी। शहबाज़ शरीफ़ सरकार के कुछ मंत्री और PoK प्रशासन के अफसरों ने बैठकर इस आंदोलन को रोकने की कोशिश की। लेकिन AAC ने साफ़ कर दिया कि वे अब किसी तरह का आधा-अधूरा समझौता नहीं करेंगे। इसीलिए बातचीत नाकाम हो गई और हज़ारों लोग सड़कों पर आ गए।
हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि व्यापारी संगठनों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को मुअज्ज़फ़राबाद के व्यापारियों ने सिर्फ इसलिए दुकानें खोलीं ताकि लोग ज़रूरी सामान ख़रीद लें, क्योंकि सोमवार से पूरा बंद शुरू हो जाएगा। यानी आम जनता अब लंबे संघर्ष की तैयारी कर रही है।

PoK के लोग दशकों से शिकायत करते आए हैं कि उन्हें न तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व सही तरह से मिलता है और न ही आर्थिक न्याय। वहाँ की जनता का मानना है कि पाकिस्तान सरकार केवल टैक्स वसूलती है लेकिन बदले में बुनियादी सुविधाएँ नहीं देती। सड़क, बिजली, रोज़गार और शिक्षा जैसे मामलों में लोग लगातार वंचित महसूस करते हैं।
यह विरोध सिर्फ महँगाई या बिजली दरों का नहीं है—यह उस नाराज़गी का नतीजा है जो वर्षों से लोगों के दिल में पनप रही थी। और अब जाकर वह फूट पड़ी है।

दूसरी तरफ सरकार को डर है कि ये आंदोलन सिर्फ सामाजिक और आर्थिक माँगों तक सीमित न रहे। अगर यह राजनीतिक स्वरूप ले लेता है और लोग “आज़ादी” के नारे लगाने लगते हैं, तो हालात पाकिस्तान के लिए और मुश्किल हो जाएंगे। यही वजह है कि सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर शहबाज़ शरीफ़ सरकार ने इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया, तो यह पूरे पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है। क्योंकि PoK का मुद्दा पहले ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के लिए संवेदनशील है। ऐसे में वहाँ की जनता का अपने ही हक़ के लिए सड़कों पर उतर आना, पाकिस्तान की छवि को गहरी चोट पहुँचा सकता है।

इस बीच आवामी एक्शन कमेटी का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ इंसाफ़ की है। उनका कहना है—”हम वही माँग रहे हैं जो हमारा हक़ है। सस्ती रोटी, सस्ती बिजली और बराबरी का प्रतिनिधित्व। अगर सरकार ये नहीं दे सकती तो हमें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ेगा।”

यानी कुल मिलाकर हालात बेहद गंभीर हैं। एक तरफ हज़ारों लोग सरकार के खिलाफ लामबंद हैं, दूसरी तरफ प्रशासन अपनी ताक़त दिखा रहा है। और इस बीच आम नागरिक, जिनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी इन बंदों और इंटरनेट शटडाउन की वजह से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रही है, वे सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह कहना मुश्किल है। लेकिन इतना तय है कि PoK में जनता का ग़ुस्सा अब रुकने वाला नहीं दिखता।

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एयर नाऊ स्पेशल

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