नई दिल्ली : किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और दलित संगठनों के नेताओं ने अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज के साथ सोमवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब ज़िला स्तर तक ले जाया जाएगा. यह एलान संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान के बाद किया गया है.
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प्रकाश राज ने कहा, “किसानों ने अपने बच्चों को पिटते हुए देखा है. यह सत्ताधारी सरकार के लिए साफ़ संदेश है कि पूरा देश एक साथ उठ खड़ा हो रहा है, क्योंकि यह सिर्फ़ राजनीतिक मुद्दा नहीं है. यह मतदाता के सम्मान और हमारे वोट देने के अधिकार का सवाल है.” उन्होंने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का आह्वान भी सत्ताधारी पार्टी ने ही किया था. लेकिन इससे जुड़े प्रदर्शन के लिए सरकार ने सौरभ दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों तक जेल में रखा.
प्रकाश राज ने कहा, “इतिहास बताता है कि दुनिया के सभी तानाशाहों ने न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल सज़ा देने के लिए किया है. गैलीलियो, सुकरात, चे ग्वेरा, भगत सिंह, महात्मा गांधी और उमर ख़ालिद के उदाहरण देखिए.” उन्होंने सवाल किया, “अगर आपके पास उन लोगों के नंबर हैं, जिनसे कथित तौर पर जज को धमकी भरे फ़ोन आए थे, तो उन्हें जेल में डालिए. आप इन दोनों (सौरभ और आशुतोष) को रिहा क्यों नहीं कर रहे हैं?”
बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में हुए आंदोलनों की तरह भारत में भी विरोध प्रदर्शन होने की संभावना से जुड़े सवाल पर प्रकाश राज ने कहा, “वहां आंबेडकर या गांधी नहीं थे. हमारे देश में संविधान है. यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन है. अगर वे बातचीत नहीं करेंगे, तो हम उन्हें वोट देकर सत्ता से बाहर कर देंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर से हो सकती है. आख़िरकार, हमारे देश के लोग मोदी को सत्ता से हटाएंगे. यही सत्ता परिवर्तन होगा.” किसान संगठन की नेता चुक्की नंजुंडास्वामी ने कहा, “सभी विरोध प्रदर्शन ज़िला स्तर पर होंगे, क्योंकि आंदोलन को विकेंद्रीकृत करना बहुत ज़रूरी है, ताकि हम ग्रामीण इलाकों तक पहुंच सकें.”

