न्यूज डेस्क: जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी कुमार राजीव रंजन के कथित दुर्व्यवहार की जांच के आदेश दिए हैं. इस सप्ताह की शुरुआत में एक आधिकारिक बैठक के दौरान रंजन को एक महिला अधिकारी के ख़िलाफ़ अनुचित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया था. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया.
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इस अधिकारी को मिली जिम्मेदारी
शुक्रवार को जारी आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग ने आईएएस अधिकारी मंदीप कौर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है. उन्हें कुमार राजीव रंजन के कथित दुर्व्यवहार के मामले की “गहन जांच” कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. सरकार के सचिव एम राजू की ओर से जारी आदेश के मुताबिक़, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अमित वर्मानी इस मामले में प्रेज़ेंटिंग ऑफ़िसर होंगे. राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वीडियो की जांच कराने को कहा है.
पूर्व में भी विवादास्पद रहे IAS
साल 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रंजन जम्मू-कश्मीर के श्रम और रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें 14 अक्तूबर को ‘मिशन युवा’ की समीक्षा बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) की अधिकारी बीनिश वानी पर चिल्लाते और उनके ख़िलाफ़ अनुचित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया था. ऑनलाइन बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
इसके बाद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं ने नाराज़गी जताई और संबंधित आईएएस अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की. रंजन का नाम साल 2020 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से उजागर किए गए हथियार लाइसेंस घोटाले के मामले में भी है. इस मामले में आरोप है कि साल 2012 से 2016 के बीच जम्मू-कश्मीर के 22 ज़िलों में एक बड़े आपराधिक गिरोह के ज़रिए 2.78 लाख अवैध और फ़र्ज़ी हथियार लाइसेंस जारी किए गए थे.
जम्मू कश्मीर के सीएम का एक्स पोस्ट
इस घटना को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्य सचिव अटल डुल्लू को पत्र लिखकर अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की. अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मैंने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे सरकारी ऑनलाइन बैठक के वीडियो को देखा है. पहली नज़र में वरिष्ठ अधिकारी का व्यवहार एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जैसी अपेक्षा की जाती है, उसके मुताबिक़ नहीं था. इसके बाद एक जूनियर अधिकारी को दी गई धमकियों ने मामले को और गंभीर बना दिया है.”

