न्यूज डेस्क: प्रशांत महासागर में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘नोलो’ लगातार ताकतवर होता जा रहा है। मौसम एजेंसियों के अनुसार अगले 24 घंटे में यह बेहद शक्तिशाली रूप ले सकता है। चक्रवात फिलहाल 180 डिग्री देशांतर के करीब पहुंच चुका है, जिसे मध्य और पश्चिमी प्रशांत के बीच प्रमुख मौसम सीमा माना जाता है।
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4 अक्टूबर को ‘नोलो’ मारो रीफ से करीब 655 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में था और लगभग 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा में बढ़ रहा था। पूर्वानुमान के मुताबिक 5 अक्टूबर को इसकी अधिकतम हवा की गति 205 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि शाम तक यह 215 किलोमीटर प्रति घंटा होने का अनुमान है। अगले 24 घंटे में इसकी रफ्तार 241 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।
फिलहाल किसी घनी आबादी वाले मुख्य भूभाग या बड़े द्वीप पर इसके सीधे प्रभाव का खतरा नहीं है। हालांकि, चक्रवात के कारण उठने वाली ऊंची और खतरनाक समुद्री लहरें निचले इलाकों के एटोल और दूरदराज के द्वीपों को प्रभावित कर सकती हैं। एटोल आमतौर पर वलय या घोड़े की नाल के आकार की प्रवाल भित्ति या द्वीपों की श्रृंखला होती है, जो बीच के लैगून को घेरती है। जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी और ज्वाइंट टाइफून वार्निंग सेंटर ‘नोलो’ की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।


