नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में भुगतान संबंधी अपने आदेश का समय पर पालन नहीं करने पर कड़ी फटकार लगाई है. सोमवार को सुनवाई के दौरान जब अदालत के सामने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की केवल फोटोकॉपी पेश की गई, तो न्यायालय ने इस पर नाराज़गी जाहिर की.
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बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कड़े शब्दों में कहा, “वे भले ही आपसे ज़्यादा अमीर हों, लेकिन आपने उन्हें जितना ठगा है, उस हिसाब से वे गरीब हैं. इस घमंड को सही जगह दिखाना ज़रूरी है. आपको पता होना चाहिए कि कब बोलना है. आपकी जगह जेल में है.”
अदालत की इस टिप्पणी से मामले की गंभीरता साफ दिखाई दी. कोर्ट ने कहा कि वह राजपाल यादव की याचिका खारिज करने के पक्ष में है, लेकिन ऐसा इसलिए नहीं कर रही क्योंकि अदालत चाहती है कि शिकायतकर्ता को उसका पैसा मिल जाए. मामले में कुल 7.5 करोड़ रुपये की राशि का विवाद है.
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को निर्देश दिया कि बकाया भुगतान हर हाल में कल तक किया जाए. अदालत ने यह भी कहा कि मामले की अगली सुनवाई परसों होगी और इसे उस दिन की कार्यसूची में सबसे पहले रखा जाएगा.
यह मामला चेक बाउंस से जुड़ा है, जिसमें भुगतान में लगातार देरी को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि उसके आदेशों का पालन समय पर होना चाहिए और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी एक फ़िल्म ‘अता, पता, लापता’ के लिए ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक निजी कंपनी से क़रीब पांच करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया था.
हालांकि, फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रही और यह निवेश कथित तौर पर डूब गया, जिसके कारण वह कंपनी को कर्ज़ वापस नहीं कर पाए.
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें तीन महीने की सजा भी सुनाई थी.


