मुंबई: वालकेश्वर इलाके में स्थित ऐतिहासिक बाणगंगा टैंक में मछलियों की मौत का मामला सामने आया है. सोमवार को यहां सैकड़ों मछलियों की मौत देखी गई. मछलियों की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत BMC को जानकारी दी. सुबह जब लोग बाणगंगा पहुंचे तो उन्होंने पानी में मरी हुई मछलियां तैरती देखीं. शुरुआत में संख्या कम लगी, लेकिन कुछ ही समय में साफ हो गया कि मछलियों की मौत बड़ी संख्या में हुई है. इसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और मौके पर टीम पहुंची.
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प्रशासन एक्शन में
सूचना मिलते ही BMC ने सफाई का काम तेज कर दिया. टैंक के पास कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जा रही है. पानी में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए एरेशन पंप लगाया गया है. साथ ही पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और जरूरत पड़ने पर टैंक का पानी बदलने की तैयारी भी की जा रही है.
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
यह पहली बार नहीं है जब बाणगंगा में मछलियों की मौत हुई है. साल 2025 में भी यहां इसी तरह बड़ी संख्या में मछलियां मरी थीं. उस समय तीन दिनों में करीब 10 हजार किलो मरी हुई मछलियां और कचरा हटाया गया था. इससे साफ है कि यह समस्या बार-बार सामने आ रही है. अभी तक इसकी पक्की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि पानी गंदा होने और ऑक्सीजन कम होने के कारण मछलियों की मौत हो रही है. टैंक में फूल और कचरा डाले जाने से पानी की हालत खराब हो जाती है. अब जांच रिपोर्ट के बाद ही असली कारण साफ होगा.
लोगों में नाराजगी
मछलियों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है. उनका कहना है कि यह जगह ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, फिर भी इसकी सही देखभाल नहीं हो रही. वालकेश्वर के निवासी संजय शिर्के ने इसको लेकर जनहित याचिका भी दायर की है और सख्त कदम उठाने की मांग की है.
बैठक में होगा फैसला
BMC ने इस मामले पर सोमवार को बैठक बुलाई है. इस बैठक में स्थानीय लोग और पुजारी शामिल होंगे. बैठक में आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. बाणगंगा में मछलियों की मौत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि इस ऐतिहासिक जगह को बचाने के लिए अब लंबे समय की ठोस योजना जरूरी है.


