धर्म: गणेश चौठ भाद्रपद यानी भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, गणेश चौठ पर शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश का पूजन करने से विघ्न (बाधा) दूर होता है। साथ ही, गणपति जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जानते हैं गणेश चौठ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और विधि क्या है
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भविष्य पुराण के अनुसार भाद्रपद (भादो) मास की चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए उनकी पूजा के लिए मध्याह्न काल का समय सबसे अच्छा माना गया है। इस दौरान उनकी पूजा करने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।
मिथिला और काशी के पंचांग के मुताबिक, इस साल गणेश चौठ 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन मध्याह्न पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक है। गणपति की पूजा के लिए 2 घंटे 28 मिनट का समय मिलेगा।
चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी जबकि इसकी समाप्ति 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगी। इस दिन चंद्रमा के उदित होने का समय शाम 7 बजकर 36 मिनट है। चंद्रोदय के बाद ‘चौठ चंद्र’ पूजन का समय शाम 7 बजकर 36 मिनट से शुरू है।
पूजा की सरल विधि
गणेश चतुर्थी को सुबह नहाने के बाद एक शुद्ध आसन पर पूरब की तरफ मुंह करके बैठ जाएं। फिर भगवान गणेश की प्रतिमा एक छोटी चौकी पर स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लें और इसके बाद कलश स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद नवग्रह, दशदिग्पाल (दसों दिशाओं के देवता) का भी पूजन करें। इसके बाद भगवान गणेश का शोडषोपचार बनाकर उसकी पूजा करें, भगवान गणेश को स्मरण करते हुए “ॐ एकदन्तं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्, पाशांकुशधरं देवं ध्यायेत् सिद्धिविनायकम्” मंत्र का जाप करें।
भगवान को दूर्वा घास की 21 गांठ अर्पित करें क्योंकि उन्हें दूर्वा घास बेहद प्रिये है। दूर्वा के साथ गणेश जी को शमी का पत्ता भी अर्पण करें। फिर भगवान को घी से बना हुआ उनका प्रिये भोग मोदक या गुड़ और घी से बना कोई दूसरा पकवान के अलावा केला, सेब, जामुन और नारियल का भोग भी लगा सकते है। फिर भगवान गणेश को सिंदूर, अबीर, सुगंधित फूल और लाल फूल अर्पित करने के साथ-साथ उन्हें धूप-दीप दिखाएं। आखिर में आरती करने के बाद तीन बार उनकी परिक्रमा करें।


