Friday, October 30, 2026

प्रिंस खान गैंग के आर्थिक तंत्र पर पुलिस का प्रहार, 100 बैंक खाते फ्रीज, वासेपुर में स्थानीय नेटवर्क पर शिकंजा

धनबाद : रंगदारी, धमकी और फायरिंग के जरिए धनबाद में खौफ का नेटवर्क खड़ा करने वाले प्रिंस खान गिरोह पर पुलिस ने अब चौतरफा शिकंजा कस दिया है। गिरोह की आर्थिक नस दबाने के लिए पुलिस ने उससे जुड़े करीब 100 बैंक खातों को फ्रीज कराया है। वहीं, पिछले एक साल में पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरोह के सात गुर्गे पांच अलग-अलग मुठभेड़ों में घायल हुए हैं। दर्जनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने साफ कहा है कि संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई किसी भी स्तर पर थमने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक संगठित अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, पुलिस का अभियान जारी रहेगा।

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फोन की घंटी से फैलता था खौफ

एक वक्त था जब कारोबारियों के फोन की घंटी बजते ही चेहरे पर खौफ उतर आता था। रंगदारी की मांग, धमकी और मांग पूरी नहीं होने पर फायरिंग—प्रिंस खान गिरोह ने धनबाद में डर का ऐसा माहौल बनाया था कि कारोबारी दहशत में रहने लगे थे। अब पुलिस ने इसी नेटवर्क को उसकी जड़ से कमजोर करने की रणनीति अपनाई है।

पुलिस की कार्रवाई सिर्फ हथियारबंद गुर्गों तक सीमित नहीं है। आर्थिक मददगारों के बैंक खातों पर कार्रवाई से लेकर वासेपुर और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी तक, गिरोह के स्थानीय और आर्थिक नेटवर्क दोनों पर वार किया जा रहा है।

नन्हें खान की हत्या

बैंक मोड़ थाना क्षेत्र के नया बाजार निवासी नन्हें खान की हत्या के बाद वासेपुर से फरार हुए प्रिंस खान पर कई आपराधिक घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगे। इसके बाद उसने धनबाद समेत झारखंड के कई जिलों में कारोबारियों को फोन कर रंगदारी मांगने और फायरिंग कराने का नेटवर्क खड़ा किया।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के नेटवर्क के संचालन में विदेश से मदद मिलने की बात जांच में सामने आती रही है। पुलिस का दावा है कि लगातार कार्रवाई से गिरोह के स्थानीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है और नए लड़कों को जोड़कर संगठन को मजबूत करना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

पांच एनकाउंटर, सात गुर्गे घायल

पिछले एक वर्ष में पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरोह से जुड़े सात गुर्गे पांच अलग-अलग मुठभेड़ों में घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, पलामू के अमन सिंह से लेकर चाईबासा के भानू मांझी तक कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

पुलिस का मानना है कि लगातार दबाव के कारण गिरोह का स्थानीय नेटवर्क कमजोर हुआ है। खासकर नए युवकों की भर्ती और उन्हें आपराधिक घटनाओं के लिए तैयार करने की उसकी क्षमता पर असर पड़ा है।

सुजीत सिन्हा की मौत

पुलिस के अनुसार, जेल में रहते हुए गैंगस्टर सुजीत सिन्हा प्रिंस खान का सहयोगी बना था। आरोप है कि वह रांची, रामगढ़ और आसपास के कारोबारियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था और अपने गुर्गों के जरिए आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिलाने में मदद करता था। सुजीत सिन्हा की मौत के बाद गिरोह के नेटवर्क की एक अहम कड़ी टूटने का पुलिस दावा है। इसके साथ ही आर्थिक मददगारों पर भी शिकंजा कसा गया है।

100 खाते फ्रीज, दर्जनों सलाखों के पीछे

गिरोह को आर्थिक मदद पहुंचाने वालों से जुड़े करीब 100 बैंक खातों को फ्रीज कराया गया है। वासेपुर और आसपास के इलाकों में दो बड़े अभियान चलाकर गिरोह के स्थानीय लिंक खंगाले गए। इस दौरान दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। कई संदिग्ध अपराधियों की पुलिस परेड भी कराई गई।

एयर नाऊ स्पेशल

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