रांची: 16 साल पुराने मामले में झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने निचली अदालत के दोषी ठहराने के फैसले को रद्द करते हुए अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है. इस बात का कोई विशिष्ट साक्ष्य मौजूद नहीं है कि पूर्व मंत्री ने किसी पर हमला किया था या भीड़ को उकसाया था.
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साल 2011 का मामला
बता दें कि साल 2010 में हजारीबाग स्थित NTPC के परियोजना कार्यालय के उद्घाटन के दौरान विरोध प्रदर्शन को लेकर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया था. पूर्व मंत्री पर आरोप था कि उद्घाटन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने विस्थापन और अस्पताल की बिल्डिंग में NTPC का कार्यालय खोले जाने के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया था. इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई थी. पूर्व मंत्री पर लोगों को उकसाने का आरोप लगाया था. बाद में इस मामले में निचली अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी.
नहीं मिला ठोस साक्ष्य
बाद में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए योगेंद्र साव ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए थे. किसी भी प्रत्यक्षदर्शी या साक्ष्य से यह साबित नहीं हुआ कि योगेंद्र साव ने व्यक्तिगत रूप से किसी अधिकारी पर हमला किया या कोई हिंसा की. अदालत ने कहा कि केवल किसी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में उपस्थित होना या राजनीतिक नेतृत्व करना ही आपराधिक उकसावे या हिंसा का आधार नहीं बन सकता, जब तक कि भाषण या कार्यों में उकसावे का ठोस प्रमाण न हो.

