Thursday, October 29, 2026

Jairam Mahto News: थाना परिसर में विधायक जयराम महतो और मुखिया समर्थक भिड़े, CCTV से खुलेगा राज

झारखंड: धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में शुक्रवार देर शाम जमकर हंगामा हुआ। मामला एक फर्जी हस्ताक्षर से जाति, आवासीय प्रमाणपत्र और वंशावली बनवाने के आरोप से जुड़ा था, लेकिन आरोपी की पैरवी करने पहुंचे डुमरी विधायक जयराम महतो और मुखिया समर्थकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात कहासुनी से हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के बाद मुखिया के बेटे ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की जांच CCTV फुटेज के आधार पर कराने की मांग की है।

पूरा विवाद बड़ापिछरी पंचायत से शुरू हुआ। पंचायत की मुखिया यशोदा देवी ने ग्रामीण गणेश दास पर उनके फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर जाति प्रमाणपत्र, आवासीय प्रमाणपत्र और वंशावली बनवाने का आरोप लगाया था। इस मामले में मुखिया की ओर से बरवाअड्डा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी गणेश दास को पकड़कर थाने लाया था।

इसी दौरान आरोपी के समर्थन में जेएलकेएम नेताओं ने डुमरी विधायक जयराम महतो को मामले की जानकारी दी। आरोप लगाया गया कि पुलिस हिरासत में गणेश दास के साथ मारपीट की जा रही है। इसके बाद विधायक ने फोन पर थाना प्रभारी से नाराजगी जताई और कुछ देर बाद खुद बरवाअड्डा थाना पहुंच गए।

विधायक के थाने पहुंचने के बाद पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी और अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ विधायक की करीब डेढ़ घंटे तक बहस हुई। विधायक की तरफ से आरोपी के साथ कथित मारपीट को लेकर सवाल उठाए गए। इसी बीच विधायक के थाना पहुंचने की जानकारी मुखिया समर्थकों को मिली।

इसके बाद बड़ी संख्या में मुखिया समर्थक भी थाना परिसर पहुंच गए। वहां दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मुखिया समर्थकों ने विधायक से सवाल किया कि फर्जी हस्ताक्षर के जरिए प्रमाणपत्र बनवाने के आरोपी की पैरवी क्यों की जा रही है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।

बहस धीरे-धीरे तेज होती गई और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया। थाना परिसर में मौजूद लोगों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बन गई। इस दौरान मुखिया के बेटे प्रदीप कुमार रजक ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और विधायक जयराम महतो ने उनका गला दबाने की कोशिश की।

प्रदीप कुमार रजक का दावा है कि इस दौरान उनके गले से खून निकलने लगा और कुछ समय के लिए उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हुई। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि घटना किसी सुनसान जगह पर नहीं, बल्कि थाने के अंदर हुई है और वहां CCTV कैमरे लगे हुए हैं। ऐसे में पुलिस को CCTV फुटेज निकालकर पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिए।

हालांकि, इस मामले में दोनों पक्षों के बीच विवाद की शुरुआत और मारपीट को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक तरफ विधायक के समर्थकों की ओर से आरोपी गणेश दास के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट का मुद्दा उठाया गया, तो दूसरी तरफ मुखिया समर्थकों ने सवाल किया कि फर्जी हस्ताक्षर के मामले में आरोपी की पैरवी क्यों की जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बरवाअड्डा थाना परिसर की सुरक्षा और पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मामला पहले से ही पुलिस जांच के दायरे में था, तो थाना परिसर में दोनों पक्ष आमने-सामने कैसे आ गए और स्थिति हाथापाई तक कैसे पहुंच गई?

फिलहाल इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। क्योंकि विवाद में एक तरफ पंचायत की मुखिया और उनके समर्थक हैं, तो दूसरी तरफ डुमरी विधायक जयराम महतो और उनके समर्थक। वहीं मूल मामला फर्जी हस्ताक्षर से प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप का है।

अब आगे की जांच में दो बातें बेहद अहम होंगी। पहली, क्या गणेश दास ने वास्तव में मुखिया के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर प्रमाणपत्र बनवाए थे? और दूसरी, थाना परिसर में हुई मारपीट के दौरान वास्तव में क्या हुआ और शुरुआत किसने की?

अगर थाना परिसर में लगे CCTV फुटेज सुरक्षित हैं और पुलिस उनकी निष्पक्ष तरीके से जांच करती है, तो घटनाक्रम की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों के बीच पुलिस जांच और CCTV फुटेज ही इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

एयर नाऊ स्पेशल

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