रांची का HEC यानी हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लंबे वक्त से मुश्किल दौर से गुजर रहा है. कभी देश के बड़े-बड़े भारी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहा HEC आज अपने पुनरुद्धार का इंतजार कर रहा है. इसी बीच 21 अगस्त को HEC को लेकर एक अहम बैठक हुई.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से केंद्रीय संसदीय उप-समिति के सदस्यों ने मुलाकात की. मुलाकात रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई. ये वही छह सदस्यीय केंद्रीय संसदीय उप-समिति है, जिसे HEC के रिवाइवल के लिए गठित किया गया है. बैठक में बात सीधी थी. HEC की मौजूदा हालत क्या है और इसे दोबारा अपने पैरों पर कैसे खड़ा किया जाए?

मुख्यमंत्री और समिति के सदस्यों के बीच HEC की वर्तमान स्थिति और उसके पुनरुद्धार से जुड़ी भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई. यानी कंपनी को लेकर आगे क्या किया जा सकता है, किस तरह की योजना बनाई जाए और HEC को दोबारा कामकाज के लिहाज से मजबूत कैसे किया जाए, इन मुद्दों पर बातचीत हुई.
इस बैठक में संसदीय उप-समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा भी मौजूद रहे. उनके अलावा सांसद विजय हांसदा, राज्यसभा सांसद सुलता देव, सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी, सांसद हँसमुखभाई सोमाभाई पटेल और सांसद चंदन चौहान भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे.
लेकिन यहां एक बात ध्यान रखने वाली है. अभी इस मुलाकात के बाद HEC के लिए किसी बड़े वित्तीय पैकेज या तत्काल राहत का ऐलान नहीं हुआ है. फिलहाल चर्चा पुनरुद्धार की योजना और आगे की कार्यवाही को लेकर हुई है.
HEC की कहानी इसलिए भी अहम है क्योंकि रांची की पहचान में इस कंपनी की बड़ी भूमिका रही है. कभी देश के भारी इंजीनियरिंग क्षेत्र में HEC का नाम बड़े संस्थानों में लिया जाता था. अब कंपनी को फिर से उस स्थिति तक पहुंचाने की चुनौती है.

फिलहाल तस्वीर इतनी है कि HEC को लेकर केंद्र की संसदीय उप-समिति रांची पहुंची, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात हुई और कंपनी के रिवाइवल पर विस्तार से बातचीत हुई. अब असली सवाल यही है कि ये बातचीत आगे किस ठोस फैसले में बदलती है और HEC को संकट से निकालने के लिए केंद्र और राज्य की तरफ से अगला कदम क्या होता है.

