Thursday, November 5, 2026

ऑपरेशन “दौरा पहाड़” में 2.20 करोड़ इनामी मिसिर बेसरा अपने शीर्ष कमांडरों के साथ हुआ गिरफ्तार, डीजीपी का बयान

रांची: झारखंड के जंगलों में तीन दशकों तक दहशत का पर्याय बना भाकपा (माओवादी) संगठन बुधवार को अपने सबसे बड़े नेतृत्व संकट में पहुंच गया। ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ के तहत झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और 209 कोबरा बटालियन , धनबाद पुलिस, गिरिडीह पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल को उसके शीर्ष कमांडरों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

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मिसिर बेसरा समेत 5 गिरफ़्तार

धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगली इलाके में चलाए गए इस सटीक ऑपरेशन में मिसिर बेसरा, 15 लाख के इनामी रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण, एरिया कमेटी सदस्य गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ तथा उनके दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया। सुरक्षाबलों ने इनके कब्जे से तीन AK-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस मुख्यालय ने इस कार्रवाई के बाद झारखंड में भाकपा (माओवादी) का शीर्ष नेतृत्व के पूरी तरह ध्वस्त होने व संगठन का नेटवर्क बिखरने की कगार पर है।

टूटा माओवादी ढांचा

पिछले दो महीनों में झारखंड पुलिस ने माओवादी संगठन पर लगातार ऐसे वार किए, जिन्होंने उसकी कमान को हिला दिया। 21 मई को 27 नक्सलियों ने हथियारों और हजारों गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया। इसके बाद 20 लाख के इनामी रविन्द्र गंझू, 25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी हुई, जबकि एसीएम बबिता उर्फ अनिता किरकू ने आत्मसमर्पण कर दिया। 28 जुलाई को 16 और नक्सली हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटे और अब मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी ने माओवादी संगठन के शीर्ष ढांचे को गहरा झटका दे दिया।

175 मामलों का आरोपी

पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा पर झारखंड सरकार ने 1 करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार ने 1 करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसके खिलाफ 175 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं गिरफ्तार मेहनत उर्फ मोछू पर 137 मामले दर्ज हैं और वह 15 लाख रुपये का इनामी था।

अब हथियार नहीं, मुख्यधारा का रास्ता चुनें

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि राज्य में माओवादी संगठन अब अपने सबसे कमजोर दौर में है। शेष बचे उग्रवादियों से अपील की गई है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। अधिकारियों का कहना है कि अब अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक राज्य से उग्रवाद का पूरी तरह अंत नहीं हो जाता।

एयर नाऊ स्पेशल

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