रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ( JSSC ) की बहुचर्चित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और ठगी के मामले में नामजद आरोपियों को अदालत से फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। राजधानी रांची की सिविल कोर्ट ने मामले के तीन मुख्य आरोपियों- मोनू कुमार, सोनू शर्मा और गौरव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी अंतरिम राहत (गिरफ्तारी पर रोक) को अगली सुनवाई तक के लिए बढ़ा दिया है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में हुई इस अहम सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से केस की अपडेटेड डायरी पेश नहीं की जा सकी, जिसके बाद अदालत ने अगली तिथि पर हर हाल में डायरी रिकॉर्ड पर लाने का कड़ा निर्देश दिया है।
Highlights:
विधि-व्यवस्था की ड्यूटी में फंसे, अदालत से मांगी मोहलत
सुनवाई के दौरान मामले के जांच अधिकारी (इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर / IO) ने कोर्ट को केस डायरी न ला पाने की वजह बताई। आईओ ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ दिनों से शहर में विधि-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) संबंधी महत्वपूर्ण ड्यूटी के कारण वे अत्यधिक व्यस्त थे। इस भारी व्यस्तता के चलते वे समय पर मामले की अपडेटेड केस डायरी तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके। आईओ ने डायरी को रिकॉर्ड पर लाने के लिए माननीय न्यायालय से अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई तक की मोहलत प्रदान की।
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कोर्ट का सख्त रुख: 30 जून को डायरी लाना अनिवार्य
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने अदालत से मांग की कि जब तक पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट और डायरी पेश नहीं करती, तब तक आरोपियों की अंतरिम सुरक्षा को बरकरार रखा जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि मुकर्रर की है। अदालत ने अनुसंधानकर्ता को बेहद कड़े शब्दों में हिदायत दी है कि 30 जून को होने वाली अगली निर्धारित सुनवाई पर हर हाल में केस की अद्यतन डायरी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि मामले की दिशा तय हो सके।
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अगली सुनवाई तक पुलिस नहीं कर सकती कोई पीड़क कार्रवाई
अदालत ने अपने पिछले आदेश को बरकरार रखते हुए तीनों आरोपियों- मोनू, सोनू और गौरव को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश जारी किया है कि अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पुलिस किसी भी प्रकार की पीड़क कार्रवाई यानी गिरफ्तारी या कोई सख्त कदम नहीं उठा सकती है। इस अंतरिम राहत के चलते फिलहाल तीनों आरोपियों को पुलिस की संभावित गिरफ्तारी से बड़ी सुरक्षा मिल गई है।
उल्लेखनीय है कि उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर झारखंड में पहले भी काफी विवाद रहा है। इस मामले में पुलिस एक बड़े गिरोह और सॉल्वर गैंग की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ऐसे में 30 जून को कोर्ट में पेश होने वाली केस डायरी इस पूरे मामले में बेहद निर्णायक साबित होने वाली है।
इस मामले में हुई पुलिसिया कार्रवाई और सॉल्वर गैंग की गिरफ्तारी से जुड़े घटनाक्रम को विस्तार से समझने के लिए आप रांची में उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक की साजिश का यह वीडियो देख सकते हैं, जो इस पूरे मामले के पीछे की बैकग्राउंड स्टोरी को विस्तार से बयां करता है।
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