रांची : राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच झारखंड की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर महज तीन शब्दों का एक पोस्ट किया— “56 नहीं, 61″। इस पोस्ट ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल मचा दी है।
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आखिर यह पांच अतिरिक्त विधायकों का आंकड़ा कहां से आया? क्या महागठबंधन के पास तय संख्या से अधिक समर्थन जुट चुका है, या फिर यह विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है? इन सवालों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
महागठबंधन के पास 56 विधायक है। इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के चार और भाकपा-माले के दो विधायक शामिल हैं। ऐसे में पार्टी के पोस्ट में 61 का आंकड़ा सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं।




