चंडीगढ़: रिलायंस जियो को उपभोक्ता कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने Jio की अपील खारिज करते हुए कंपनी को ग्राहक को 12,729 रुपये रिफंड और 7,000 रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। मामला इंटरनेट सर्विस में वादाखिलाफी का है।
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क्या है पूरा मामला?
सुशील कुमार अग्रवाल ने 13 मार्च 2024 को Reliance Jio से 12,729 रुपये का सालाना ब्रॉडबैंड फाइबर प्लान खरीदा था। 14 मार्च को कनेक्शन लगाया गया। लेकिन ग्राहक का आरोप है कि कंपनी ने ऑप्टिकल फाइबर वायर्ड कनेक्शन की जगह वायरलेस एयरफाइबर कनेक्शन दे दिया। कंपनी के लोगों ने भरोसा दिलाया कि सर्विस वायर्ड फाइबर जैसी ही चलेगी और डेटा अनलिमिटेड मिलेगा। मगर 18 दिन बाद ही मैसेज आने लगे कि 1,000 GB डेटा लिमिट खत्म हो गई है और ज्यादा डेटा के लिए पैसे देने होंगे।
ठगा महसूस करने पर सुशील ने 3 अप्रैल 2024 को कनेक्शन बंद करवाकर रिफंड मांगा। Jio ने डिवाइस तो वापस ले लिया और ईमेल में रिफंड का वादा भी किया, लेकिन पैसे नहीं लौटाए।
कोर्ट में क्या हुआ?
परेशान होकर ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग में केस किया। जिला आयोग ने Jio को रिफंड और मुआवजा देने को कहा। Jio ने इसके खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। Jio का तर्क था कि ग्राहक ने खुद एयरफाइबर चुना था और प्लान में 1,000 GB की लिमिट साफ बताई गई थी।
राज्य आयोग का फैसला
चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद्मा पांडे और सदस्य राजेश कुमार आर्य ने Jio की अपील खारिज कर दी। आयोग ने कहा, “जिला आयोग का आदेश बिल्कुल सही है। इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है। आयोग ने माना कि ग्राहक ने पूरे साल का पेमेंट एडवांस किया था, लेकिन सर्विस सिर्फ 2 हफ्ते चली। Jio ने खुद ईमेल में रिफंड का वादा किया था, फिर भी पैसे नहीं दिए।
अब Jio को क्या देना होगा?
- 12,729 रुपये: पूरे साल का रिफंड ब्याज सहित
- 7,000 रुपये: मानसिक परेशानी का मुआवजा + मुकदमे का खर्च
यह फैसला साफ संदेश देता है कि टेलीकॉम कंपनियां वादे के मुताबिक सर्विस नहीं देंगी तो उपभोक्ता कोर्ट सख्त कार्रवाई करेगा।



