Friday, July 24, 2026

बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का मध्य हिस्सा गंगा नदी में गिरा, सीमांचल का संपर्क प्रभावित

भागलपुर: बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा रविवार देर रात अचानक गंगा नदी में गिर गया। हादसा रात करीब 1:10 बजे हुआ। घटना के बाद भागलपुर का सीमांचल क्षेत्र से संपर्क प्रभावित हो गया है। राहत की बात यह रही कि समय रहते पुल पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार पुल के पिलर संख्या 4 और 5 के बीच बने एक्सपेंशन जॉइंट में शाम से ही दरार आने लगी थी। पहले जॉइंट का एक हिस्सा धंसा और फिर देर रात पुल का एक स्लैब गंगा में गिर गया। उस समय पुल पर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन की सतर्कता के कारण लोगों को समय रहते सुरक्षित हटा लिया गया।

प्रशासन ने तुरंत रोकी आवाजाही

घटना की सूचना मिलते ही भागलपुर के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई। ट्रैफिक को दूसरे रास्तों की ओर मोड़ दिया गया। प्रशासन ने नवगछिया और भागलपुर दोनों तरफ पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना को रोका जा सके। वाहनों को फिलहाल मुंगेर पुल के रास्ते भेजा जा रहा है।

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सतर्कता से टला बड़ा हैादसा- डीएम

भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि रात करीब 12:35 बजे से स्लैब धंसने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इससे पहले ही एहतियात के तौर पर पुल से गाड़ियों को हटा दिया गया था। इसी वजह से कोई जनहानि नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पुल की स्थिति की जांच के लिए जल्द ही एक हाई लेवल कमेटी मौके पर पहुंचेगी। जिला प्रशासन पहले भी पुल की स्थिति को लेकर संबंधित विभागों को जानकारी दे चुका था। नेशनल हाईवे विभाग के अधिकारियों के अनुसार पुल पर नया स्लैब लगाने और मरम्मत का काम पूरा करने में कम से कम 15 दिन का समय लग सकता है। पुल निगम की टीम ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।

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16 जिलों के लिए लाइफलाइन है विक्रमशिला सेतु

विक्रमशिला सेतु बिहार के सबसे महत्वपूर्ण पुलों में से एक माना जाता है। यह पुल भागलपुर को नवगछिया और सीमांचल क्षेत्र समेत करीब 16 जिलों से जोड़ता है। हर दिन लगभग एक लाख लोग और 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। यह पुल दक्षिणी छोर पर एनएच-80 और उत्तरी छोर पर एनएच-31 को जोड़ता है, जिससे बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच सीधा संपर्क बना रहता है। इसके जरिए पूर्वोत्तर राज्यों तक व्यापार और माल ढुलाई भी आसान होती है। पुल में एक्सपेंशन जॉइंट और गैप की समस्या को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। साल 2016 में पुल की बड़े स्तर पर मरम्मत की गई थी। उस दौरान कई हिस्सों को मजबूत करने के लिए बियरिंग बदले गए और कार्बन प्लेट लगाई गई थी। इसके बाद 2020 में भी मरम्मत का काम हुआ था। मार्च 2026 में भी पुल के कुछ पिलरों के आसपास बनी सुरक्षा दीवारों के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी। हालांकि उस समय प्रशासन ने कहा था कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है। करीब 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला सेतु भारत के लंबे नदी पुलों में गिना जाता है। इसका नाम प्राचीन विक्रमशिला महाविहार के नाम पर रखा गया है, जो पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित एक प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र था।

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