चाईबासा : चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से पांच बच्चों को कथित रूप से संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में आरोपी लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार को पुलिस ने रांची से गिरफ्तार कर लिया है।
बताया जा रहा है कि झारखंड हाईकोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।
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बता दें कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर पहले ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। आरोपी मनोज कुमार लंबे समय से पुलिस की पकड़ से फरार चल रहा था। आखिरकार पुलिस ने उसे रांची से गिरफ्तार कर लिया।
झारखंड हाईकोर्ट में याचिका
चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में कथित रूप से संक्रमित रक्त चढ़ाने के कारण एचआईवी संक्रमित हुए पांच मासूम बच्चों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। याचिका में प्रत्येक बच्चे को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने के साथ-साथ जीवनभर मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि सभी पांच बच्चे (उम्र पांच से सात वर्ष) एचआइवी संक्रमित हैं और उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। बता दें कि अक्टूबर 2025 में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान कथित लापरवाही के कारण ये बच्चे संक्रमित हो गए थे।
एसटी व पिछड़े वर्ग के हैं पीड़ित
बताया जा रहा है कि पीड़ित बच्चे पश्चिमी सिंहभूम तथा सरायकेला-खरसावां जिलों के अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग परिवारों से आते हैं। इनके परिवार अत्यंत गरीब हैं और दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। इन पांच बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा में सुरक्षित रक्त चढ़ाने, एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी और वायरल लोड जांच, पोषण सहायता और सामाजिक काउंसलिंग की मांग शामिल है।
अन्य मांगों में शामिल
प्रभावित परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने और एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने की भी मांग की गई है। याचिका में एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि एक बच्चे को जानबूझकर संक्रमित रक्त चढ़ाया गया। एक बच्चे के मामले में आरोप है कि ब्लड बैंक के एक कर्मचारी ने व्यक्तिगत रंजिश में जानबूझकर संक्रमित खून चढ़ाया। राज्य सरकार ने इस मामले में दो लाख रुपये की मुआवजा राशि देने और कुछ अधिकारियों को निलंबित करने की कार्रवाई की है, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इसे नाकाफी बताया है।



