Monday, April 20, 2026

महिला की कपड़े फाड़कर आग लगाने की कोशिश, 200 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

न्यूज डेस्क: क्या किसी की आस्था इतनी कमज़ोर हो सकती है कि वो एक महिला को जिंदा जलाने पर उतारू हो जाए? क्या बाबा साहेब का सम्मान पुलिस की गाड़ियाँ फूंकने से बढ़ता है? लखीमपुर खीरी का मोतीपुर गाँव मंगलवार को सुलग उठा। एक तरफ भंडारा चल रहा था, दूसरी तरफ नफरत की खिचड़ी पक रही थी।

एक महिला की चीखें, पेट्रोल की गंध और चारों तरफ से घेरे हुए 200 लोगों की वो खूंखार भीड़! कल्पना कीजिए, आप अपने अधिकारों की बात करने जाते हैं और बदले में आपको जिंदा जलाने की कोशिश की जाती है. लखीमपुर खीरी के मोतीपुर गांव में मंगलवार को जो हुआ, वो सिर्फ ‘बवाल’ नहीं था, वो लोकतंत्र की हत्या थी. जिस संविधान ने हमें जीना सिखाया, उसी संविधान के रचयिता की जयंती पर सरेआम कानून को फूंका गया. दरअसल, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है.

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, लखीमपुर खीरी जिले में अंबेडकर जयंती पर मंगलवार शाम जमकर बवाल हुआ. एक तरफ श्रद्धा का सैलाब और भंडारा चल रहा था. लेकिन इस श्रद्धा के पीछे एक ‘खेल’ रचा जा रहा था. गांव के कुछ लोगों ने तय किया कि आज बिना परमिशन, बिना किसी कागजी कार्रवाई के, उस जमीन पर मूर्ति रख दी जाएगी जो विवादित है जैसे ही ये खबर चंदा देवी पुलिस को लेकर पहुंचती है देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो जाती है. पुलिस चंदा देवी के साथ उलझ जाती है जिसमें बाबा साहेब की मुर्ती टूट जाती है जिसके बाद हिंसक भींड़ चंदा देवी पर टूट पड़ती है. चंदा देवी को भीड़ ने ऐसे घेरा जैसे वो कोई अपराधी हो. उनके कपड़े फाड़ दिए गए. पेट्रोल जालकर जलाने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस ने चंदा देवी को बचा लिया.

मामला कैसे इतना तूल पकड़ा?

आपको बताते है कि ये मामला इतना तुल कैसे पकड़ा. लखीमपुर के गोला गोकर्ण थाना क्षेत्र के बांकेगंज में मोतीपुर गांव है. इस गांव में दलित वर्ग के गौतम और भार्गव समाज के लोग रहते हैं. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती पर मंगलवार को गांव में भंडारा चल रहा था. यह आयोजन गौतम समाज ने किया था, जो भीम आर्मी को सपोर्ट करता है. यहां कई सालों से खाली पड़ी बौद्ध विहार की भूमि पर डॉक्टर अंबेडकर की मूर्ति स्थापित की जानी थी.

ग्राम प्रधान वीरेंद्र गौतम भी मौजूद थे. दोपहर करीब 12 बजे प्रधान वीरेंद्र गौतम कार्यक्रम से चले गए. उनके जाने के बाद मूर्ति गांव वालों ने स्थापित कर दी. मूर्ति स्थापना के बाद गांव के लोग रैली में चले गए. मौके पर केवल महिलाएं मौजूद थीं. ग्रामीणों का आरोप है कि शाम 4 बजे बांकेगंज की रहने वाली भार्गव समाज की चंदा देवी पुलिस को लेकर आईं. उन्होंने बिना परमिशन मूर्ति स्थापना का विरोध किया. यह देखकर पहले से मौजूद महिलाएं भी विरोध में आ गईं.

छीना-झपटी में टूटी मूर्ति

पुलिस ने मूर्ति हटवाना चाहा, इसी बीच छीना-झपटी शुरू हो गई और मूर्ति टूट गई. महिलाओं ने आरोप लगाया कि मूर्ति को बचाने के प्रयास में पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया. आरोप है कि मूर्ति टूटने और लाठीचार्ज की घटना से लोगों में आक्रोश फैल गया. उन्होंने बांकेगंज चौकी इंचार्ज संतोष तिवारी और चंदा देवी के खिलाफ नाराजगी जताई.

इस दौरान ग्रामीणों ने चंदा देवी की पिटाई शुरू कर दी. पुलिस ने घेरा बनाकर चंदा को बड़ी मुश्किल से बचाया. भीड़ ने सीओ गोला रमेश तिवारी, नायब तहसीलदार भानु प्रताप सिंह, संसारपुर चौकी इंचार्ज जितेंद्र सिंह की गाड़ियों में तोड़फोड़ की. फिर उनमें आग लगा दी. सड़क पर खड़ी पास के ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 3 के प्रधान के बेटे सुखवीर सिंह की बोलेरो में भी तोड़फोड़ की गई.

कपड़े फाड़ कर आग लगाने की कोशिश

पुलिस को हालात संभालने में करीब 5 घंटे लग गए. पुलिस का कहना है कि ग्रामीणों के पास मूर्ति स्थापित करने की कोई अनुमति नहीं थी. इसे जबरन विवादित जगह पर रखा गया था. ग्राम प्रधान, राजस्व विभाग और पुलिस के अधिकारियों ने मीटिंग की है. लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है.

मामले को लेकर पीड़ित महिला चंदा देवी ने पुलिस को लिखित शिकायत में आरोप लगाया- बिना अनुमति आंबेडकर की मूर्ति लगाने का उन्होंने विरोध किया था. जिसे लेकर करीब 200 लोगों ने उन पर हमला बोल दिया था. दौड़ा-दौड़ाकर बुरी तरह पीटा. कपड़े तक फाड़ दिये. हमलावरों ने उन पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश भी की थी. एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने बताया- इस मामले में घटना के बरामद वीडियो फुटेज और पीड़ित की लिखित शिकायत के आधार पर 8 नामजद समेत 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

इसे भी पढ़े: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड सरकार और इंडियन बैंक के बीच एमओयू, जानें क्यों?

आरोपियों में शामिल लोगों की पहचान

नामजद आरोपियों में ग्राम प्रधान वीरेंद्र काशीराम, ग्राम प्रधान का मुंशी, जैपाल, वीरपाल, रामधनी, अवधेश (जैपाल का पुत्र), कौशल (रामप्रसाद का पुत्र) और गुड़िया (जैपाल की पुत्री) शामिल हैं. अज्ञात हमलावरों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है. डीएम और एसपी समेत जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल, पुलिस अधीक्षक डॉ ख्याति गर्ग, एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह, एएसपी पवन गौतम, अमित कुमार राय पुलिस बल के साथ मौके पर कैंप कर रहे हैं.

घटना के बाद से क्षेत्र में अब शांति है. माहौल बिगाड़ने वालों को चिन्हित किया जा रहा है. एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने बताया- इस मामले में घटना के बरामद वीडियो फुटेज और पीड़ित की लिखित शिकायत के आधार पर 8 नामजद समेत 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

आज का कड़वा सच

आज का कड़वा सच ये है कि हम प्रतीकों की लड़ाई में इतने अंधे हो गए हैं कि सिद्धांतों को भूल चुके हैं. बाबा साहेब ने ‘Rule of Law’ (कानून का शासन) दिया था, ‘Rule of Mob’ (भीड़ का तंत्र) नहीं. लखीमपुर खीरी में जो हुआ, वो न तो दलित समाज की गरिमा बढ़ाता है और न ही अंबेडकर जी को सम्मान देता है. अगर मूर्ति अवैध थी, तो उसे हटाना पुलिस का काम था. और अगर पुलिस ने गलती की, तो कोर्ट का दरवाज़ा खुला था.

लेकिन आगज़नी और महिला पर हमला? ये तो सीधे-सीधे आतंकवाद जैसी मानसिकता है. आज वो जलती हुई गाड़ियाँ और चंदा देवी के फटे हुए कपड़े हमसे कुछ पूछ रहे हैं. वो पूछ रहे हैं कि अगर आज हम धर्म या समाज के नाम पर इस हिंसा को जायज ठहराएंगे, तो कल जब भीड़ आपके घर के बाहर होगी, तब संविधान को कहाँ ढूंढेंगे? याद रखिएगा, जो भीड़ आज दूसरे के लिए पेट्रोल लेकर खड़ी है, वो कल आपके घर को भी जला सकती है. बाबा साहेब ने कलम दी थी, आग लगाने के लिए तीली नहीं. अगर आज ये अपराधी नहीं पकड़े गए, तो समझ लीजिए कि लखीमपुर की ये आग सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, ये हमारे लोकतंत्र को भस्म कर देगी.

एयर नाउ स्पेशल

कोर्ट ने ठहराया दोषी, फिर भी कुर्सी बरकरार! रघुनंदन...

रांची: झारखंड में विकास की गाड़ी जिन कंधों पर टिकी है, उनमें से एक कंधा कानूनी रूप से 'दागी' निकल चुका है। दक्षिणी छोटानागपुर...
- Advertisement -spot_img
App Logo

Download Our App

Download Now ➥

ट्रेंडिंग खबर