Friday, June 19, 2026

झारखंड में बढ़ रहे ड्रग्स के कारोबार पर हाईकोर्ट सख्त, CID ने रोकथाम के लिए तैयार किया ब्लूप्रिंट

राँची: झारखंड में जड़ों तक फैल चुके नशीले पदार्थों के काले कारोबार पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य में बढ़ते ड्रग्स के जाल को लेकर मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अहम सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल छोटे पैडलर्स की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि पुलिस को इस धंधे के किंगपिन (माफिया) तक पहुँचना होगा।

CID ने पेश किया एक्शन प्लान

अदालत की सख्ती के बाद अपराध जांच विभाग (CID) ने राज्य में ड्रग्स की रोकथाम के लिए दो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) पेश किए।
पहला SOP: नशे के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने और तस्करों की पहचान के लिए।
दूसरा SOP: ड्रग्स के आर्थिक नेटवर्क (फाइनेंस) को ध्वस्त करने के लिए।
अदालत ने राज्य सरकार को इन दोनों एसओपी को तत्काल प्रभाव से लागू करने का कड़ा निर्देश दिया है।

बड़ी मछलियों पर वार करने की जरूरत- कोर्ट

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि NDPS एक्ट के तहत मामले तो दर्ज हो रहे हैं, लेकिन असल सिंडिकेट अब भी पुलिस की पहुँच से बाहर है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार खतरनाक स्तर तक फैल चुका है। जांच एजेंसियां अक्सर छोटी मछलियों को पकड़कर औपचारिकता पूरी कर लेती हैं, लेकिन जब तक ड्रग्स के किंगपिन और इस सिंडिकेट के फाइनेंस की कमर नहीं तोड़ी जाएगी, तब तक यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी।

NCB, CID और पुलिस के बीच बनेगा त्रिकोण

हाईकोर्ट ने ड्रग्स के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), CID और झारखंड पुलिस को बेहतर तालमेल के साथ काम करने की हिदायत दी है। साथ ही, युवाओं को इस दलदल से बचाने के लिए स्कूल और कॉलेजों में सघन जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने इन निर्देशों के साथ याचिका को निष्पादित कर दिया है, लेकिन सरकार और पुलिस प्रशासन पर इस ब्लूप्रिंट को जमीन पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी डाल दी है।

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